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​रायपुर,09 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / “Ministry of Food Processing Industries: Consultation meeting with the industry sector to plan the next phase…” खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हितधारकों के साथ एक उच्च-स्तरीय विचार-विमर्श किया।

इसका उद्देश्‍य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को वित्तीय सहायता देने के भविष्य के रोडमैप पर चर्चा करना और प्रोत्साहन/सब्सिडी योजनाओं के अगले चरण की रूपरेखा तैयार करना था।

इस परामर्श बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, आईएफसीआई लिमिटेड, इन्वेस्ट इंडिया के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, विभिन्न क्षेत्रीय उद्योग संघों तथा उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआईएसएफपीआई) के लाभार्थियों ने भाग लिया।

बैठक का उद्देश्य योजना के प्रस्तावित विस्तार की रूपरेखा, दायरा, कार्यान्वयन ढांचा तथा प्रोत्साहन संरचना के संबंध में उद्योग जगत से व्यवस्थित सुझाव प्राप्त करना था।

बैठक की शुरुआत मौजूदा पीएलआईएसएफपीआई योजना की प्रमुख उपलब्धियों पर आधारित एक प्रस्तुति के साथ हुई।

मूल रूप से निर्धारित 7,722 करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य के मुकाबले लाभार्थी कंपनियों ने 22 राज्यों में स्थित 212 विनिर्माण इकाइयों में 9,207 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है, जो प्रारंभिक प्रतिबद्धता से लगभग 20 प्रतिशत अधिक है।

पीएलआई योजना के अंतर्गत समर्थित उत्पादों की बिक्री वित्त वर्ष 2019-20 में 58,758 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1,08,854 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जिसमें 10.82 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की गई।

इसी अवधि में निर्यात भी 11.05 प्रतिशत के सीएजीआर के साथ बढ़कर 20,840 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस योजना के माध्यम से लगभग 3.35 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।

साथ ही अधिसूचित जनजातीय क्षेत्रों में 3,265 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को भी बढ़ावा मिला है।

योजना की एक उल्लेखनीय उपलब्धि मोटे अनाज पर आधारित प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में देखने को मिली है। इस श्रेणी के उत्पादों की बिक्री 104 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ी है, जबकि मोटे अनाज की खरीद में 97 प्रतिशत सीएजीआर की उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

मुख्य भाषण देते हुए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव अविनाश जोशी ने कहा कि सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए अगली पीढ़ी की प्रोत्साहन योजनाओं हेतु साक्ष्य-आधारित एवं उद्योग-प्रेरित नीति ढांचा विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि भविष्य की नीति संरचना का मुख्य उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को सुदृढ़ करना, भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी को अपनाने को प्रोत्साहित करना, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना तथा किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को अधिकतम लाभ सुनिश्चित करना होगा।

बैठक के दौरान खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के प्रमुख उप-क्षेत्रों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इनमें रेडी-टू-कुक/रेडी-टू-ईट खाद्य उत्पाद, बेकरी एवं कन्फेक्शनरी, प्रसंस्कृत फल एवं सब्जियां, पेय पदार्थ एवं मसाले, समुद्री उत्पाद, डेयरी, न्यूट्रास्यूटिकल्स, कार्यात्मक खाद्य (फंक्शनल फूड्स), पादप-आधारित प्रोटीन, पशु आहार तथा खाद्य प्रसंस्करण मशीनरी जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल थे।

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने व्यापक रूप से सुझाव दिया कि योजना के अगले चरण में अधिक लचीला तथा परिणामोन्मुखी प्रोत्साहन ढांचा अपनाया जाना चाहिए।

इसके अंतर्गत योजना के दायरे का विस्तार कर उसमें खाने-पीने की नई श्रेणियों को शामिल करने, निर्यात, आयात प्रतिस्‍थापन, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), नवाचार तथा प्रौद्योगिकी अपनाने जैसे रणनीतिक उद्देश्यों के आधार पर अलग-अलग प्रोत्साहन संरचनाएं विकसित करने तथा प्रोत्साहनों को रोजगार सृजन एवं पूंजी निवेश से जोड़ने जैसे सुझाव दिए गए।

प्रतिभागियों ने विदेशों में भारतीय खाद्य उत्पादों की ब्रांडिंग एवं विपणन के लिए सहायता को सुदृढ़ करने, प्रतिपूर्ति व्यवस्था में सुधार लाने, महत्वपूर्ण कच्चे माल के लिए बैकवर्ड इंटीग्रेशन को सुविधाजनक बनाने, कार्यान्वयन प्रक्रियाओं को सरल करने, पात्रता मानदंडों को तर्कसंगत बनाने तथा स्वचालन, गुणवत्ता संवर्धन और उत्पाद नवाचार को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

बैठक में न्यूट्रास्यूटिकल्स, फंक्शनल फूड्स, पादप-आधारित प्रोटीन, डेयरी सामग्री, मूल्य संवर्धित समुद्री उत्पाद, पशु आहार, पालतू पशुओं के भोजन तथा उन्नत खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों को ऐसे उभरते क्षेत्रों के रूप में विशेष महत्व देने पर जोर दिया गया, जिनमें घरेलू और निर्यात, दोनों स्तरों पर व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

परामर्श बैठक में इस बात पर भी विशेष बल दिया गया कि समर्पित अनुसंधान अवसंरचना, क्लिनिकल वैलिडेशन सुविधाओं, उत्कृष्टता केन्‍द्रों, निर्यात संवर्धन पहलों तथा नियामकीय सहयोग के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी नवाचार इकोसिस्‍टम तैयार किया जाए।

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा देने, स्वदेशी सामग्री के विकास, आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय खाद्य ब्रांडों को प्रोत्साहित करने के लिए अधिक प्रभावी नीतिगत समर्थन की भी वकालत की।