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रायपुर 30 मार्च 2026 / ETrendingIndia / Pandit Vijay Shankar Mehta’s lecture on ‘Be Happy – Keep Happy’ in Oxyzone: Do not lose your patience, restraint and peace even if you do not want to, nor get in a hurry./ खुश रहें खुश रखें व्याख्यान , रायपुर वेलफेयर फाउंडेशन सोसाइटी एवं सीनियर सिटीजंस रिक्रिएशन सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को ऑक्सीजोन गार्डन स्थित श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में श्रद्धेय पंडित विजयशंकर मेहता ने ‘खुश रहें -खुश रखें ‘ विषय पर व्याख्यान दिया.

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के हृदयस्थल और यहाँ के हरे-भरे वातावरण में श्री हनुमान चालीसा का सस्वर सामूहिक पाठ किया गया.

श्रद्धेय मेहता ने अपनी ओजस्वी वाणी से उपस्थित जनसमुदाय को रामचरित मानस एवं श्री हनुमान चालीसा की चौपाइयों और विभिन्न कालचक्र विशेषकर राज्याभिषेक के दौर की घटनाओं के माध्यम से बताया कि हम जीवन में कैसे ख़ुश रह सकते है, कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपना धैर्य, शांति और आवेश पर नियंत्रण रखकर संयमित आचरण कर सकते हैं.

श्री मेहता ने कहा, पहले की जमाने में घर का बालक 16 वर्ष की उम्र में जब बड़ा होता था,तो बड़ों- बुजुर्गों की अवहेलना करने करना करने लगता था. बाद में यह उम्र घटकर दस और अब 5 से भी कम हो गई है. आज की पीढ़ी बड़ों की आज्ञा को मानने की पहली एआई में जाकर उसे कंफर्म करती है.

श्री मेहता ने रामायण के विभिन्न पात्रों, मां केकई, मां कौशल्या, सीता जी तथा अन्य पात्रों के उदाहरणों ,उनके व्यक्तित्व और वृत्तियों को उदाहरण देते हुए बताया और कहा कि उन्हें समझें, सोचें और सही को अपने जीवन में उतारें. उन्होंने कहा, जब घर, परिवार और जीवन में मनचाहा हो तो भी वे पूरी शांति, धैर्य, सामंजस्य बनाए रखें और आवेश में नहीं आए.

श्री मेहता ने कहा कि जब राज्याभिषेक की पूर्व रात्रि को मंथरा ने माँ केकई का ब्रेनवाश किया और माँ केकई ने कोपभवन में राजा दशरथ को पहले वचन के रूप में भरत को राजगद्दी देने और दूसरे वचन के रूप में 14 वर्ष के लिए राम को वनवास भेजने को कहा तो राम जी ने मन ही मन मुस्कुराते हुए इसे सहर्ष स्वीकार किया।

श्रीराम बाहर से गृहस्थ, लेकिन अन्दर से बैरागी थे.बड़े धैर्यपूर्वक शांति से रामजी ने कहा, माँ केकई ने उन्हें वनों का राजा बना दिया है.

मां कौशल्या ने भी कहा, अगर यह वचन राजा दशरथ के होते तो उन्हें वे तोड़वा देती, लेकिन यह वचन माँ केकई के हैं और इस कारण इन्हें सहर्ष स्वीकार करना चाहिए.

सीता जी ने कहा, उन्होंने राम के साथ उनके हर सुख -दुख में साथ रहने और निभाने का वचन लिया है और वनों में उनके साथ उनका साथ देंगी. उन्होंने इस बात को भी नकार दिया कि उनके लिए वन असुरक्षित रहेंगे और कहा रघुकुल वीर राम के रहते उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं है.

श्री मेहता ने कहा, राम जी और उनके भाई लक्ष्मण का आचरण
बिलकुल अलग था, लेकिन यह दोनों के प्रेम सामंजस्य में किसी प्रकार के आड़े नहीं हैं। लक्ष्मण और हनुमानजी में भी भगवान राम को हनुमान ज्यादा प्रिय थे और विपत्ति आने पर हनुमान जी ने ही लक्ष्मण के प्राण बचाए.

श्री मेहता ने कहा माँ केकई की वृत्ति भी हम सबके भीतर है और
आज मोबाइल के माध्यम से घर- घर में मंथरा आ गई है.

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनसमूह उपस्थित हुए. कार्यक्रम के समापन में प्रसाद एवं छाछ वितरण किया गया.