102 ambulance service 102 ambulance service
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रायपुर, 17 अगस्त 2026 / ETrendingIndia / कोरबा जिले के पसान क्षेत्र के बाघिनडांड़ गांव में 102 एंबुलेंस सेवा को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका।

जानकारी के अनुसार, महिला का घर मुख्य सड़क से करीब 400 मीटर अंदर दुर्गम रास्ते पर था। एंबुलेंस गांव तक पहुंची, लेकिन घर तक नहीं जा सकी। इसके बाद महिला को परिजन पैदल मुख्य सड़क की ओर ले जाने लगे।

रास्ते में पेड़ के नीचे हुआ प्रसव

परिजनों के अनुसार, महिला की प्रसव पीड़ा रास्ते में बढ़ गई। इसके बाद उसे पेड़ के नीचे ही बच्चे को जन्म देना पड़ा।

102 एंबुलेंस सेवा से मदद नहीं मिलने के बाद परिजनों ने निजी वाहन की व्यवस्था की। इसके लिए उन्हें करीब 2 हजार रुपये खर्च करने पड़े। बाद में महिला और नवजात को अस्पताल ले जाया गया।

मितानिन और एंबुलेंस चालक के बयान अलग

मामले में मितानिन और एंबुलेंस चालक के बयान अलग-अलग हैं। मितानिन का आरोप है कि उन्होंने एंबुलेंस कर्मियों से 5 से 10 मिनट रुकने का आग्रह किया था।

उनके अनुसार, एंबुलेंस कर्मी इंतजार किए बिना वहां से चले गए। बाद में चालक के निजी नंबर पर संपर्क करने पर भी वापस आने से इनकार किया गया।

चालक ने आरोपों को बताया गलत

वहीं, 102 एंबुलेंस के चालक अमर श्रीवास्तव ने इन आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि महिला का घर पहाड़ के ऊपर था। रास्ता बेहद दुर्गम होने के कारण एंबुलेंस वहां नहीं जा सकती थी।

चालक के मुताबिक, एंबुलेंस नाले के पास करीब डेढ़ घंटे तक रुकी थी। इसी दौरान रायपुर से भी इमरजेंसी कॉल आने लगे। इसलिए उन्हें वहां से जाना पड़ा।

एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था पर उठे सवाल

102 एंबुलेंस सेवा ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस घटना ने दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पर सवाल खड़े किए हैं।


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