रायपुर, 15 जनवरी 2026/ ETrendingIndia / Artificial insemination has changed the face of dairy farming: Milk production has increased/ कृत्रिम गर्भाधान डेयरी विकास , प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत दंतेवाड़ा जिले में पशुधन विकास को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों का सफल उपयोग किया जा रहा है।
इसका सकारात्मक उदाहरण भांसी स्थित बंगाली कैंप के पशुपालक श्री गौरंग पाल की डेयरी है, जो आज क्षेत्र के अन्य पशुपालकों के लिए प्रेरणा बन गई है।
पशुधन विकास विभाग दंतेवाड़ा द्वारा उपलब्ध कराई गई कृत्रिम गर्भाधान सुविधा का लाभ उठाकर श्री गौरंग पाल ने अपने पशुओं की नस्ल में सुधार किया है। इस तकनीक के माध्यम से अब तक 9 स्वस्थ बछड़े-बछियों का जन्म हो चुका है। इससे न केवल पशुओं की गुणवत्ता बेहतर हुई है, बल्कि दूध उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
वर्तमान में श्री पाल की डेयरी से प्रतिदिन लगभग 100 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। वे इस दूध को 70 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचकर अच्छी आय प्राप्त कर रहे हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और पशुपालन उनके लिए एक स्थायी आजीविका का साधन बन गया है।
10 जनवरी 2026 को पशुधन विकास विभाग द्वारा हीट सिंक्रोनाइजेशन तकनीक के माध्यम से उनके पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान किया गया। इस प्रक्रिया से पशुओं में समय पर और सफल प्रजनन संभव हो सका, जिससे डेयरी संचालन अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बन गया।
श्री गौरंग पाल की सफलता यह दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं और आधुनिक तकनीकों का सही उपयोग कर पशुपालन को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और पशुधन विकास विभाग की यह पहल जिले के पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
