LAND USE RULES: Land use rules from 1984 in Chhattisgarh have been revised! Land usage regulations are now simplified for the common man; the notification has also been published in the official gazette.LAND USE RULES
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रायपुर, 07 अक्टूबर 2026/ LAND USE RULES : छत्तीसगढ़ में जमीन के इस्तेमाल से जुड़े करीब 42 साल पुराने Land Use Rules में बड़ा बदलाव किया गया है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन कर भूमि उपयोग की व्यवस्था को पहले की तुलना में अधिक सरल और लचीला बनाया है। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए प्रावधानों को राजपत्र में प्रकाशित भी कर दिया गया है।

सरकार का दावा है कि इस बदलाव से आम लोगों, उद्यमियों और निवेशकों को भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं में राहत मिलेगी। पहले कई गतिविधियों के लिए नियमों और अनुमतियों की जटिलता के कारण लोगों को अलग-अलग स्तर पर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। नई व्यवस्था का उद्देश्य अनावश्यक अनुपालन बोझ कम करना और भूमि उपयोग को बदलती जरूरतों के अनुरूप बनाना है।

केंद्र के डीरिगुलेशन अभियान के अनुरूप बड़ा सुधार

भारत सरकार द्वारा पुराने और जटिल नियमों को सरल बनाने तथा अनुपालन बोझ कम करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ ने भूमि उपयोग से जुड़े पुराने नियमों में व्यापक सुधार किया है।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा थी कि Land Use से जुड़े सुधारों को जल्द लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे तेजी से विकसित हो रहे राज्य में भूमि उपयोग व्यवस्था को समयानुकूल बनाना बेहद जरूरी है।

अब नई जरूरतों के अनुसार विकास करना होगा आसान

आज अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है। नई सेवाएं, संस्थाएं, व्यवसाय और तकनीकी गतिविधियां लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में केवल पहले से निर्धारित गतिविधियों की सूची के आधार पर भूमि उपयोग को नियंत्रित करने से कई बार नई गतिविधियों के लिए प्रक्रिया जटिल हो जाती है।

नई व्यवस्था का उद्देश्य स्पष्ट सीमाओं के भीतर व्यापक गुंजाइश उपलब्ध कराना है, ताकि नई और उभरती गतिविधियों के लिए भी अवसर बने रहें। इससे निवेश, रोजगार और स्थानीय विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

आवासीय से कृषि तक Land Use की कैटेगरी स्पष्ट

संशोधित व्यवस्था में अलग-अलग भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए गतिविधियों का स्पष्ट वर्गीकरण किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से—

  • आवासीय
  • वाणिज्यिक
  • औद्योगिक
  • सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक
  • परिवहन
  • मनोरंजन
  • कृषि

शामिल हैं।

इस वर्गीकरण से अलग-अलग क्षेत्रों के स्वरूप और जरूरत के हिसाब से भूमि उपयोग व्यवस्था को अधिक स्पष्टता मिलेगी।

शहरों और कस्बों के विस्तार में मिलेगी मदद

छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही आवास, व्यापार, सेवाओं, संस्थागत गतिविधियों और अधोसंरचना की जरूरतें भी बदल रही हैं।

मंत्री ओपी चौधरी के मुताबिक सरल नियम, कम अनुपालन बोझ और अधिक लचीली नियोजन व्यवस्था विकास परियोजनाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे राज्य में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में भी मदद मिलेगी।

नई और उभरती गतिविधियों के लिए खुलेगा रास्ता

भूमि उपयोग नियमन में बदलाव का एक अहम उद्देश्य यह भी है कि व्यवस्था केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित न रहे। भविष्य में सामने आने वाली नई सेवाओं और गतिविधियों के लिए भी नियोजन व्यवस्था में पर्याप्त गुंजाइश बनी रहे। इससे एक तरफ नियोजित विकास को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ नई आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों के लिए बेहतर वातावरण तैयार हो सकता है।

राजपत्र में प्रकाशित हो चुके हैं नए प्रावधान

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह केवल प्रस्तावित बदलाव नहीं है। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के बाद संशोधित प्रावधानों को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है।

अब राजपत्र में दी गई कैटेगरी-वाइज व्यवस्था के तहत अलग-अलग भूमि उपयोग क्षेत्रों में क्या अनुमत है और किन गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा, इसे स्पष्ट किया गया है।

यहां राजपत्र की कैटेगरी-वाइज तालिका/प्रावधान प्रकाशित करें]

भूमि उपयोग श्रेणीप्रमुख प्रावधान
आवासीयराजपत्र के अनुसार अनुमत एवं प्रतिबंधित गतिविधियां
वाणिज्यिकराजपत्र के अनुसार अनुमत एवं प्रतिबंधित गतिविधियां
औद्योगिकराजपत्र के अनुसार अनुमत एवं प्रतिबंधित गतिविधियां
सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिकराजपत्र के अनुसार प्रावधान
परिवहनराजपत्र के अनुसार प्रावधान
मनोरंजनराजपत्र के अनुसार प्रावधान
कृषिराजपत्र के अनुसार प्रावधान

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