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मुंबई, 15 सितंबर। Maharashtra News : विधायक पराग शाह ने एक दिन के लिए अपनी पहचान, पद और संपन्नता को पीछे छोड़कर आम जरूरतमंद व्यक्ति की जिंदगी को करीब से महसूस किया। खास बात यह रही कि इस दौरान राह चलते लोगों को भनक तक नहीं लगी कि उनके सामने खड़ा व्यक्ति कोई आम भिखारी नहीं, बल्कि इलाके का विधायक है।

गुरु की सीख पर विधायक ने छोड़ी अपनी पहचान

जैन धर्म में चातुर्मास का समय आत्मचिंतन, साधना और त्याग से जुड़ा माना जाता है। इसी दौरान पराग शाह के आध्यात्मिक गुरु राष्ट्रसंत पूज्य नम्रमुनि महाराज की प्रेरणा पर उन्होंने यह अनोखा प्रयोग करने का फैसला किया। संदेश था कि इंसान को कभी-कभी अपनी सुविधाओं और पहचान से बाहर निकलकर उस जिंदगी को भी समझना चाहिए, जिसे समाज का एक वर्ग रोज जीता है।

पराग शाह ने गुरु की इस सीख को केवल सुनने के बजाय उसे खुद अनुभव करने का फैसला किया। उन्होंने अपना सुरक्षा घेरा और राजनीतिक पहचान पीछे छोड़ दी। मेकअप और साधारण कपड़ों के जरिए अपना हुलिया बदला और घाटकोपर पूर्व की उन्हीं सड़कों पर पहुंच गए, जहां लोग उन्हें आमतौर पर विधायक के रूप में पहचानते हैं।

हाथ में कटोरा, सामने राहगीर और मदद की उम्मीद

इस बार पराग शाह के हाथ में न कोई फाइल थी, न मोबाइल और न ही विधायक होने का परिचय। उनके हाथ में था सिर्फ एक कटोरा। सड़क किनारे खड़े होकर उन्होंने राहगीरों से मदद मांगी। कुछ लोग बिना ध्यान दिए आगे बढ़ गए, जबकि कुछ लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार पैसे या खाने की चीजें दीं।

एक जनप्रतिनिधि के लिए यह अनुभव बिल्कुल अलग था। आमतौर पर लोग अपनी समस्याएं लेकर विधायक के पास पहुंचते हैं, लेकिन इस दिन पराग शाह खुद लोगों के सामने खड़े थे और यह पूरी तरह सामने वाले की इच्छा पर निर्भर था कि वह उनकी मदद करता है या नहीं।

घंटों तक किसी को नहीं हुआ विधायक होने का एहसास

बताया गया कि इस पूरे अनुभव के दौरान घंटों तक किसी आम व्यक्ति ने उन्हें पहचानकर यह नहीं समझा कि सामने खड़ा व्यक्ति घाटकोपर पूर्व का विधायक पराग शाह है। उनके बदले हुए हुलिए ने उनकी वास्तविक पहचान पूरी तरह छिपा दी थी।

किसी ने नजरअंदाज किया तो किसी ने खाना दिया और किसी ने पैसे देकर मदद की। इस दौरान मिले अलग-अलग अनुभवों ने उन्हें जरूरतमंद व्यक्ति के नजरिए से समाज को देखने का मौका दिया।

मेकअप उतरा तो मदद करने वालों के सामने आया सच

दिन ढलने के साथ यह प्रयोग खत्म हुआ। पराग शाह ने अपना मेकअप उतारा और अपने वास्तविक रूप में लौट आए। लेकिन इसके बाद उन्होंने उन लोगों से दोबारा मिलने का फैसला किया, जिन्होंने कुछ घंटे पहले उनकी मदद की थी।

वे दुकानदारों और आम लोगों के पास पहुंचे और उन्हें बताया कि जिस व्यक्ति को उन्होंने जरूरतमंद समझकर पैसे या खाना दिया था, वह वास्तव में विधायक पराग शाह थे। यह सुनकर कई लोगों के लिए यह अनुभव बेहद चौंकाने वाला रहा।

बिना पहचान जाने मदद करने वालों को कहा धन्यवाद

पराग शाह ने उन सभी लोगों का आभार जताया, जिन्होंने बिना उनकी पहचान जाने और बिना किसी उम्मीद के उनकी मदद की थी। इस पूरे प्रयोग को आध्यात्मिक आत्मचिंतन और समाज के जरूरतमंद वर्ग की परिस्थितियों को समझने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

यह अनुभव कुछ घंटों का जरूर था, लेकिन इसका उद्देश्य अपनी राजनीतिक और आर्थिक पहचान से बाहर निकलकर उस जिंदगी को महसूस करना था, जिसे जरूरतमंद लोग हर दिन जीते हैं।


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