Share This Article बीजापुर, 14 अक्टूबर 2026। Maoist Surrender : छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान के बीच बीजापुर में छह माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण की खबर सामने आई है। बीजापुर पुलिस के मुताबिक, सरेंडर करने वाले छह कैडरों पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें चार कैडर ओडिशा में सक्रिय माओवादी नेटवर्क से जुड़े बताए गए हैं, जबकि दो का संबंध पश्चिम बस्तर डिवीजन और गंगालूर एरिया कमेटी से बताया गया है। पुलिस के अनुसार, इनमें माओवादी नेता गणेश उईका का सुरक्षा गार्ड और कंपनी नंबर-02 का ए-सेक्शन कमांडर भी शामिल है। सरेंडर करने वाले छह माओवादी कैडरों के नाम बीजापुर पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में रानी सोढ़ी उर्फ संध्या, पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता, सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष, कोसा माड़वी उर्फ सतीश, देवे मड़कम उर्फ जन्नी और लालू ताती शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, रानी सोढ़ी, पांडो पोड़ियम, सुक्कू कुड़ियम और कोसा माड़वी पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम था। वहीं, देवे मड़कम पर दो लाख और लालू ताती पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस तरह कुल इनामी राशि 35 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने बताया कि इनमें चार पीपीसीएम और दो पीएम रैंक के कैडर शामिल हैं। गणेश उईका का सुरक्षा गार्ड भी शामिल पुलिस के अनुसार, रानी सोढ़ी उर्फ संध्या, पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता और सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष ओडिशा में सक्रिय कंपनी नंबर-08 से जुड़े थे। सुक्कू कुड़ियम को माओवादी नेता गणेश उईका का सुरक्षा गार्ड बताया गया है। वहीं, कोसा माड़वी उर्फ सतीश कंपनी नंबर-02 से जुड़ा था और ए-सेक्शन कमांडर की भूमिका निभा रहा था। इन चारों पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। देवे मड़कम और लालू ताती की भूमिका पुलिस के मुताबिक, देवे मड़कम उर्फ जन्नी ओडिशा में कंपनी नंबर-08 की पार्टी सदस्य थीं। उन्हें माओवादी नेता जगदीश इरपा उर्फ रमन्ना की सुरक्षा टीम से जुड़ा भी बताया गया है। उन पर दो लाख रुपये का इनाम था। दूसरी ओर, लालू ताती गंगालूर एरिया कमेटी का पार्टी सदस्य बताया गया है, जिस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार, सभी छह कैडर माओवादी संगठन की अलग-अलग इकाइयों से जुड़े थे। DRG और CRPF की कार्रवाई में भूमिका बीजापुर पुलिस के मुताबिक, इस कार्रवाई में जिला रिजर्व गार्ड (DRG), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 170वीं बटालियन और पुलिस के प्रयासों की भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान, संगठन के भीतर बढ़ते दबाव, हिंसक विचारधारा से मोहभंग और शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने इन कैडरों को संगठन छोड़ने के लिए प्रेरित किया। आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया बीजापुर के पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार गुप्ता के मुताबिक, जिले में नक्सल विरोधी अभियान के साथ हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। आत्मसमर्पण करने वाले छह कैडरों के लिए शासन की नीति के अनुसार पुनर्वास संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी, ताकि उन्हें सामान्य जीवन में लौटने का अवसर मिल सके। Share This Article Post navigation सरोधा बांध आने वाले पर्यटकों को धारदार हथियार लेकर डराने-धमकाने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार