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रायपुर, 16 अक्टूबर 2026 / ETrendingIndia / भारतीय वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु और चिली के अटाकामा रेगिस्तान में ऐसे खनिजों की पहचान की है, जो मंगल ग्रह पर मौजूद परिस्थितियों को समझने में मदद कर सकते हैं।

केरल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अत्याधुनिक लेजर रमन स्पेक्ट्रोमीटर की मदद से मेलेंटेराइट और जिप्सम खनिजों का अध्ययन किया।

इनसे मंगल ग्रह पर अतीत में पानी की मौजूदगी और जीवन के अनुकूल परिस्थितियों के संकेतों को समझने में मदद मिल सकती है।

दो महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान

शोधकर्ताओं ने तमिलनाडु के नेवेली में मेलेंटेराइट तथा चिली के अटाकामा रेगिस्तान और तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के बीहड़ क्षेत्र में जिप्सम की पहचान की।

ये दोनों जलयुक्त सल्फेट खनिज हैं, जो पानी और चट्टानों के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं की जानकारी देते हैं।

मंगल पर पानी के इतिहास को समझने में मदद

  • जिप्सम: अतीत में पानी की सक्रियता के प्रमाण सुरक्षित रख सकता है। इसके खनिज ढांचे में जैविक संकेत भी संरक्षित रह सकते हैं।
  • मेलेंटेराइट: सल्फाइड खनिजों के ऑक्सीकरण से बनने वाला यह खनिज कुछ समय के लिए बनी नम और अम्लीय परिस्थितियों के संकेत देता है।

इन विशेषताओं से वैज्ञानिक मंगल ग्रह पर प्राचीन जलवायु और संभावित जीवन के अनुकूल वातावरण का अध्ययन कर सकते हैं।

आधुनिक तकनीक से हुई पुष्टि

केरल विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में डीएसटी-एफआईएसटी के सहयोग से उपलब्ध लेजर रमन स्पेक्ट्रोमीटर की मदद से खनिजों की पहचान की पुष्टि की गई।

इस तकनीक से खनिजों के विशिष्ट स्पेक्ट्रल संकेतों का विश्लेषण किया जाता है।

प्रतिष्ठित शोध पत्रिका में प्रकाशित निष्कर्ष

इस शोध के निष्कर्ष जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: प्लैनेट्स में दो शोध पत्रों के रूप में प्रकाशित हुए हैं। शोध दल अब पृथ्वी के अन्य चरम परिस्थितियों वाले क्षेत्रों का अध्ययन कर रहा है, ताकि आदिम जीवन और ग्रहों पर रहने योग्य वातावरण के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।

क्यों है यह महत्वपूर्ण?

पृथ्वी पर मंगल जैसे वातावरण वाले स्थलों का अध्ययन भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को उन स्थानों की पहचान करने में मदद कर सकता है, जहां पानी और प्राचीन जीवन के संभावित संकेत मिलने की संभावना हो।


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