रायपुर, 31 जुलाई 2026 / ETrendingIndia / नासा के क्यूरियोसिटी (Curiosity) रोवर ने मंगल ग्रह पर एक ऐसी अनोखी खोज की है, जिसने वैज्ञानिकों का उत्साह बढ़ा दिया है।
रोवर को “वैले ग्रांडे” (Valle Grande) क्षेत्र में मधुमक्खी के छत्ते जैसी लाखों बहुभुज (हनीकॉम्ब) आकृतियों का विशाल विस्तार मिला है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज मंगल के प्राचीन जल, जलवायु और वहां कभी जीवन के अनुकूल परिस्थितियों के महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।
विशाल क्षेत्र में फैली हनीकॉम्ब जैसी आकृतियां
क्यूरियोसिटी रोवर ने 19 और 20 जून को भेजी गई 360 डिग्री तस्वीरों में बहुभुज आकार की दरारों का विशाल क्षेत्र दर्ज किया। ये आकृतियां लगभग 4 से 8 सेंटीमीटर चौड़ी हैं और जहां तक रोवर की नजर पहुंची, वहां तक फैली दिखाई देती हैं।
वैज्ञानिकों के लिए नई पहेली
नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार पहले भी ऐसी आकृतियां छोटे क्षेत्रों में देखी गई थीं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या और इतने विशाल क्षेत्र में पहली बार मिली हैं। अब इनकी संरचना और रासायनिक गुणों का अध्ययन किया जा रहा है ताकि इनके बनने की वास्तविक प्रक्रिया समझी जा सके।
कभी पानी और कीचड़ से बना होगा यह क्षेत्र
विशेषज्ञों का मानना है कि ये बहुभुज प्राचीन कीचड़ के सूखने, तापमान में लगातार बदलाव या सतह के नीचे दबे अवसादों से पानी निकलने जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाओं से बने हो सकते हैं। यह संकेत देता है कि अरबों वर्ष पहले मंगल पर पानी मौजूद था।
जीवन की संभावना पर फिर बढ़ी उम्मीद
क्यूरियोसिटी रोवर पहले भी मंगल पर सल्फर क्रिस्टल, उल्कापिंड, कार्बन आधारित कार्बनिक अणु और प्राचीन झीलों-नदियों के प्रमाण खोज चुका है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल पर कभी सूक्ष्मजीवी जीवन के लिए आवश्यक पानी, रासायनिक तत्व और पोषक तत्व मौजूद थे।
14 वर्षों से जारी है क्यूरियोसिटी का मिशन
क्यूरियोसिटी रोवर अगस्त 2012 में मंगल पर उतरा था और तब से लगातार माउंट शार्प क्षेत्र का अध्ययन कर रहा है। इसकी खोजें मंगल के भूगर्भीय इतिहास और वहां जीवन की संभावनाओं को समझने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
