Share This Article रायपुर, 6 अक्टूबर 2026। ETrendingIndia / सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने अपनी साझा सुरक्षा व्यवस्था को सक्रिय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। तीनों देशों के बीच बने मक्का रक्षा गठबंधन की रणनीतिक, राजनीतिक एवं रक्षा समिति की सोमवार को रियाद में आपात बैठक हुई। बैठक में सऊदी अरब के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों और संभावित खतरों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि तीनों देश सामूहिक रक्षा से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धताओं को लागू करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाएंगे। इसके तहत निर्धारित सैन्य बलों और आवश्यक क्षमताओं को उपलब्ध कराने तथा जरूरत पडऩे पर उन्हें तेजी से सऊदी अरब में तैनात करने की व्यवस्था पर सहमति बनी है। हालांकि, संयुक्त बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पाकिस्तान और तुर्की की ओर से कितने सैनिक सऊदी अरब भेजे जाएंगे और उनकी तैनाती कब तक पूरी होगी। बयान में हूती विद्रोहियों का भी सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया है। इसके बावजूद बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सऊदी अरब को हाल के दिनों में गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यमन में जारी संघर्ष और सऊदी क्षेत्र को निशाना बनाए जाने की आशंकाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आपात बैठक में पाकिस्तान की ओर से उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर शामिल हुए। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक टेलीविजन कार्यक्रम में बताया कि सऊदी अरब की जरूरत के मुताबिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि सऊदी सेना मुख्य युद्ध अभियानों में सक्रिय है, जबकि पाकिस्तान और तुर्की की सेनाएं फिलहाल सहयोगी भूमिका निभा रही हैं। ख्वाजा आसिफ के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना टोही और निगरानी से जुड़े अभियानों में भी भूमिका निभा रही है। हालांकि, पाकिस्तान और तुर्की की सैन्य मौजूदगी का वास्तविक स्तर सार्वजनिक नहीं किया गया है। बैठक में तीनों देशों ने सऊदी अरब के नागरिक इलाकों, आर्थिक प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाए जाने की निंदा की। मक्का और मदीना जैसे इस्लाम के पवित्र शहरों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह के खतरे या हमले की कोशिश पर भी गंभीर चिंता जताई गई। पाकिस्तान और तुर्की ने सऊदी सशस्त्र बलों की तैयारियों और पेशेवर क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि वे सऊदी अरब की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में उसके साथ खड़े हैं। मक्का रक्षा गठबंधन की यह आपात बैठक ऐसे समय हुई है, जब यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले क्षेत्रों के खिलाफ अपना सैन्य अभियान तेज कर चुका है। गठबंधन का घोषित लक्ष्य हूतियों के कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस हासिल करना बताया जा रहा है। ऐसे में पाकिस्तान और तुर्की के साथ सऊदी अरब की रक्षा साझेदारी का सक्रिय होना क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यमन संघर्ष का दायरा बढऩे और क्षेत्र में नए सैन्य समीकरण बनने की आशंकाएं भी बढ़ गई हैं। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने अगस्त में त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य तीनों देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा और प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करना है। समझौते के तहत यदि तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा और ऐसी स्थिति में सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया देने का प्रावधान है। मौजूदा तनाव के बीच इस समझौते की व्यवस्था का सक्रिय होना सऊदी अरब की सुरक्षा नीति और पश्चिम एशिया में बदलते सामरिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। Share This Article Post navigation भारतीय-अमेरिकी समाजसेवी शर्मिला मोना सिन्हा ‘नेशनल वुमेन्स हॉल ऑफ फेम’ में शामिल सऊदी अरब पर हूतियों के ड्रोन-मिसाइल हमले तेज, कई प्रमुख ठिकाने निशाने पर