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नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026। Meta : फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा को अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य में उपभोक्ता संरक्षण कानून के उल्लंघन के मामले में 25 अरब डॉलर का सिविल जुर्माना भरने का आदेश दिया गया है। 21 अक्टूबर को सामने आए इस फैसले में अदालत ने कंपनी के खिलाफ लगाए गए जुर्माने को पहले प्रस्तावित 219 अरब डॉलर से घटाकर 25 अरब डॉलर कर दिया। मामले में जूरी ने फेसबुक से जुड़े 4.3 करोड़ से अधिक कानूनी उल्लंघन पाए थे। मेटा ने फैसले के खिलाफ अपील करने की योजना जताई है, इसलिए जुर्माने का अंतिम भुगतान कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

क्या है मेटा के खिलाफ पूरा मामला?

न्यू मैक्सिको के न्याय विभाग ने फेसबुक की डेटा प्राइवेसी नीतियों, उपयोगकर्ताओं को दी गई जानकारी और प्लेटफॉर्म पर गलत सूचनाओं तथा हेट स्पीच से निपटने के तरीकों की जांच की थी। राज्य की ओर से आरोप लगाया गया कि कंपनी ने उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता को लेकर भ्रामक जानकारी दी, डेटा हटाने के वादों का पालन नहीं किया और थर्ड-पार्टी डेवलपर्स की ओर से उपयोगकर्ता डेटा जुटाने पर पर्याप्त निगरानी नहीं रखी।

मामले की शुरुआत 2010 के दशक में सामने आए कैम्ब्रिज एनालिटिका डेटा प्राइवेसी विवाद से जुड़ी थी। हालांकि, कानूनी कार्यवाही के दौरान वर्ष 2010 से 2021 के बीच फेसबुक की डेटा प्रथाओं पर भी ध्यान दिया गया।

219 अरब डॉलर से घटाकर 25 अरब डॉलर हुआ जुर्माना

रिपोर्ट के मुताबिक, जूरी के निष्कर्षों के बाद न्यू मैक्सिको की ओर से प्रति उल्लंघन 5,000 डॉलर के हिसाब से 219 अरब डॉलर से अधिक का जुर्माना निर्धारित करने की मांग की गई थी। बाद में अमेरिकी न्यायाधीश फ्रांसिस मैथ्यू ने इसे घटाकर 25 अरब डॉलर कर दिया। अदालत के आदेश में मेटा की ओर से किए गए उल्लंघनों की संख्या और उनकी गंभीरता का उल्लेख किया गया।

यह जुर्माना न्यू मैक्सिको के उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत लगाया गया है। इसका उद्देश्य कंपनी के आचरण के लिए वित्तीय दंड तय करना है। हालांकि, फैसले के खिलाफ अपील की योजना के चलते आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

फेसबुक की प्राइवेसी नीतियों पर क्यों उठे सवाल?

मामले में आरोप था कि फेसबुक ने उपयोगकर्ताओं को उनकी प्राइवेसी सेटिंग्स और व्यक्तिगत डेटा पर नियंत्रण के बारे में पर्याप्त और सही जानकारी नहीं दी। अदालत के आदेश में कंपनी के नेतृत्व से जुड़े सार्वजनिक बयानों और आंतरिक संदेशों का भी उल्लेख किया गया।

न्यू मैक्सिको के अधिकारियों का कहना था कि उपयोगकर्ताओं के डेटा की सुरक्षा और उसे साझा करने की प्रक्रिया को लेकर कंपनी की जवाबदेही तय होनी चाहिए। मेटा की ओर से इन निष्कर्षों और कार्रवाई पर आपत्ति जताई गई है।

पहले भी लग चुका है अरबों डॉलर का जुर्माना

फेसबुक को इससे पहले भी डेटा प्राइवेसी मामले में भारी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ा था। अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) ने कैम्ब्रिज एनालिटिका विवाद के बाद 2019 में कंपनी पर 5 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया था। न्यू मैक्सिको का मौजूदा 25 अरब डॉलर का आदेश उससे पांच गुना है।

इसके अतिरिक्त, न्यू मैक्सिको में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी मेटा पर अलग-अलग आर्थिक दंड लगाए जाने की रिपोर्ट है। ऐसे मामलों ने सोशल मीडिया कंपनियों की डेटा सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों पर कानूनी बहस को तेज किया है।

मेटा करेगी अपील, आगे क्या होगा?

मेटा ने फैसले के खिलाफ अपील करने की योजना जताई है। कंपनी के वकील सीजे महोनी ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि इससे न्यू मैक्सिको में कारोबार करना मुश्किल हो सकता है। कंपनी का तर्क है कि मुकदमा ऑनलाइन अभिव्यक्ति पर नए प्रतिबंध लगाने की कोशिश करता है।

रिपोर्ट के अनुसार, अदालत के आदेश में जुर्माने पर भुगतान होने तक सालाना 15 प्रतिशत ब्याज का प्रावधान भी बताया गया है। हालांकि, अपील के कारण अंतिम भुगतान और मामले के निष्कर्ष पर आगे कानूनी प्रक्रिया का असर पड़ सकता है। यह मामला अमेरिका में बड़ी टेक कंपनियों की जवाबदेही और उपभोक्ता डेटा की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।


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