Share This Article रायपुर, 05 सितंबर/ ETrendingIndia / राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे को लेकर लंदन में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। भागवत के दौरे के विरोध में 20 नागरिक समाज संगठनों ने एकजुट होकर आवाज उठाई है। वहीं, विरोध और आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए आरएसएस ने कहा है कि संगठन हर किसी के साथ बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है।आरएसएस के मीडिया प्रमुख सुनील आंबेकर ने लंदन में कहा कि संगठन किसी भी तरह की बहस और विचारों के स्वस्थ आदान-प्रदान की उम्मीद करता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचार रखने वाले लोगों के साथ संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मोहन भागवत के लंदन पहुंचने के बाद 20 नागरिक समाज संगठनों ने उनके दौरे का कड़ा विरोध किया है। इन संगठनों ने लंदन के मेयर सादिक खान को एक आधिकारिक पत्र भेजकर मांग की है कि ‘ग्रेटर लंदन प्राधिकरणÓ आरएसएस से जुड़े सभी कार्यक्रमों का पूरी तरह बहिष्कार करे। पत्र में इन संगठनों ने आरएसएस को कथित तौर पर ‘सत्तावादी और सैन्यवादीÓ संगठन बताते हुए उस पर यूरोपीय फासीवाद से प्रेरित होने का आरोप लगाया है। संगठनों ने अपने पत्र में आरएसएस की विचारधारा और गतिविधियों को लेकर भी गंभीर आपत्तियां जताई हैं। नागरिक संगठनों ने मेयर सादिक खान से अपील की है कि वह न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की तर्ज पर मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे की सार्वजनिक रूप से निंदा करें। इसके साथ ही उन्होंने मेट्रोपॉलिटन पुलिस से यह जानकारी भी मांगी है कि स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। मोहन भागवत का ब्रिटेन दौरा आरएसएस के वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। यह दौरा संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित संपर्क यात्रा का भी हिस्सा है, जिसके तहत भागवत तीन देशों की यात्रा कर रहे हैं। भागवत 2 सितंबर से 7 सितंबर तक ब्रिटेन में रहेंगे। इस दौरान वह लंदन में एक बड़े जनसमूह को संबोधित करने वाले हैं। उनके इस दौरे को आरएसएस के विदेशों में संपर्क और संवाद बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले अमेरिका और कनाडा के दौरों के दौरान भी मोहन भागवत को विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा था। अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित प्रसिद्ध मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आरएसएस के ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशनÓ यानी ‘सार्वभौमिक एकता समारोहÓ का आयोजन किया गया था। इसमें 5,000 से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा किया गया था। कार्यक्रम के दौरान भागवत ने कहा था कि विविधता और एकता भारत के डीएनए का हिस्सा हैं। उन्होंने ‘धर्मÓ की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा था कि धर्म केवल पूजा-पद्धति या किसी एक मजहब अथवा धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, धर्म इन सबसे व्यापक अवधारणा है, जो जीवन को थामने और उसे आगे बढ़ाने का सिद्धांत प्रस्तुत करती है। Share This Article Post navigation दिल्ली मेट्रो से सफर कर एसआरसीसी पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, बच्चों के साथ की बातचीत, शताब्दी समारोह में हुए शामिल