MP Semiconductor Summit 2026MP Semiconductor Summit 2026
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इंदौर, 24 अक्टूबर 2026। MP Semiconductor Summit 2026 : मध्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम सामने आया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट 2026 के दौरान राज्य को लगभग 5,800 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इन प्रस्तावों से 10,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। राज्य सरकार चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर निर्माण और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन का मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दे रही है।

सेमीकंडक्टर समिट में शामिल हुए 1,000 से अधिक प्रतिनिधि

इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट 2026 में निवेश, तकनीकी विकास और कौशल निर्माण पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और स्वीडन सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों समेत 1,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया। समिट में सरकार ने चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर निर्माण, एडवांस्ड पैकेजिंग और अन्य उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की योजनाएं प्रस्तुत कीं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान सेमीकंडक्टर की कमी ने इस क्षेत्र के रणनीतिक महत्व को स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत करने को अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।

पांच कंपनियों को जमीन आवंटन के लिए आशय पत्र

समिट के दौरान पांच कंपनियों को जमीन आवंटन के लिए आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) दिए गए। इन परियोजनाओं में कुल 9,625 करोड़ रुपये के निवेश और 4,450 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना जताई गई है।

प्रस्तावित परियोजनाओं में ग्वालियर में 50 मेगावाट क्षमता का हाइपरस्केल डेटा सेंटर, भोपाल में लिथियम-सेल निर्माण इकाई और इंदौर तथा भोपाल में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़ी उत्पादन सुविधाएं शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, सात कंपनियों को इंदौर के इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स में कार्यालय स्थान उपलब्ध कराने की पेशकश की गई है। इन सुविधाओं से 1,280 से अधिक रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

चिप डिजाइन और क्वांटम तकनीक के लिए बनेंगे उत्कृष्टता केंद्र

राज्य सरकार ने सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना भी सामने रखी है। यह केंद्र चिप डिजाइन, वीएलएसआई तकनीक, अनुसंधान, प्रोटोटाइप निर्माण और कौशल विकास पर केंद्रित होगा। इसके साथ ही फोटोनिक्स और क्वांटम तकनीक के विकास के लिए अलग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की घोषणा की गई है।

इन पहलों का उद्देश्य उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करना तथा उद्योगों की जरूरत के अनुसार कुशल कार्यबल तैयार करना है।

34 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिए 25 से अधिक नीतियां पेश की हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और अन्य पहलों के माध्यम से लगभग 34 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उनके अनुसार, इनमें से 30 प्रतिशत से अधिक प्रस्ताव कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता 5,000 मेगावाट से बढ़कर 32,000 मेगावाट होने का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने निवेशकों को तेजी से मंजूरी, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।

कौशल विकास और उद्योग सहयोग पर भी जोर

समिट के दौरान राज्य सरकार ने कौशल विकास, निवेश प्रोत्साहन और उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए पांच संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल्स काउंसिल ऑफ इंडिया, सेमी इंडिया और मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी सहित संस्थान शामिल हैं।

सरकार का लक्ष्य निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। हालांकि, घोषित निवेश प्रस्तावों और रोजगार अनुमानों का वास्तविक परिणाम परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।


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