Share This Article रायपुर, 11 सितंबर 2026। ETrendingIndia / ओडिशा पुलिस की साइबर अपराध एवं आर्थिक अपराध शाखा (CC&EO) ने साइबर निवेश ठगी से मिले पैसों को अलग-अलग बैंक खातों में भेजकर निकालने वाले संगठित ‘म्यूल अकाउंट’ नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मामले में चार आरोपियों प्रकाश शर्मा, सनी बारवे, प्रसन्न कुमार नाग और जुबराज दीप को गिरफ्तार किया है। क्या होता है ‘म्यूल अकाउंट’? ‘म्यूल अकाउंट’ ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी या अन्य अपराधों से मिले पैसों को इधर-उधर भेजने और निकालने के लिए किया जाता है। अपराधी अक्सर लोगों को नौकरी, कमीशन या पैसे का लालच देकर उनके बैंक खाते इस्तेमाल करते हैं। ठगी का पैसा ऐसे पहुंचता है दूसरे खातों में साइबर अपराधी निवेश के नाम पर लोगों से ठगी करने के बाद रकम को सीधे अपने खाते में रखने के बजाय कई ‘म्यूल अकाउंट’ में ट्रांसफर करते हैं। इसके बाद पैसा अलग-अलग खातों में भेजा जाता है या एटीएम और अन्य माध्यमों से निकाल लिया जाता है। खाता देने वाले भी फंस सकते हैं सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर किसी व्यक्ति ने लालच में अपना बैंक खाता किसी दूसरे को इस्तेमाल करने दिया और उसमें साइबर ठगी का पैसा आया, तो पुलिस की जांच में खाताधारक भी कानूनी परेशानी में फंस सकता है। बैंक खाता फ्रीज होने के साथ उसकी अपनी रकम भी अटक सकती है। ऐसे बचें ‘म्यूल अकाउंट’ के जाल से किसी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता इस्तेमाल न करने दें। खाते या सिम को किराए पर देने के लालच में न आएं। बैंक डिटेल, OTP या UPI PIN किसी से साझा न करें। कम समय में ज्यादा मुनाफे वाली निवेश योजनाओं से सावधान रहें। संदिग्ध लेनदेन की जानकारी तुरंत बैंक और साइबर पुलिस को दें। साइबर ठगी से बचने का सबसे आसान नियम है—अपना बैंक खाता, सिम और डिजिटल बैंकिंग जानकारी किसी दूसरे के इस्तेमाल के लिए न दें। Share This Article Post navigation ओडिशा : विनयतोष मिश्र के हाथों पुलिस की कमान, महिला सुरक्षा और नशामुक्ति पहली प्राथमिकता…