National Legal Services Day
National Legal Services Day
Share This Article

रायपुर / ETrendingIndia / न्याय तक सबकी पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में कदम

भारत 9 नवंबर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस 2025 मनाने जा रहा है। यह दिवस 1987 में पारित ‘विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम’ की स्मृति में मनाया जाता है, जो 1995 में लागू हुआ था।
इसका उद्देश्य समाज के हर वर्ग, विशेष रूप से वंचित और कमजोर तबकों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है।


लाखों नागरिकों को मिला निःशुल्क कानूनी सहयोग

कानून और न्याय मंत्रालय के अनुसार, 2022 से 2025 के बीच 44.22 लाख नागरिकों को निःशुल्क कानूनी सहायता और सलाह प्रदान की गई।
इसी अवधि में राष्ट्रीय, राज्य और स्थायी लोक अदालतों के माध्यम से 23.58 करोड़ से अधिक मामलों का निपटारा किया गया।
इससे स्पष्ट होता है कि देश में वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणाली तेजी से सशक्त हो रही है।


न्याय तक समग्र पहुंच के लिए ‘दिशा’ योजना

राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस 2025 के अवसर पर सरकार की ‘डिज़ाइनिंग इनोवेटिव सॉल्यूशंस फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस (DISHA)’ योजना चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
इस योजना के तहत फरवरी 2025 तक 2.10 करोड़ से अधिक लोगों को कानूनी सलाह, प्री-लिटिगेशन सेवाओं और जागरूकता कार्यक्रमों का लाभ मिला है।
₹250 करोड़ की इस सरकारी योजना ने सस्ती न्याय प्रणाली तक लोगों की पहुंच को व्यापक बनाया है।


एलएडीसीएस प्रणाली से सशक्त हुआ न्याय तंत्र

लीगल एड डिफेंस काउंसल सिस्टम (LADCS) वर्तमान में 668 जिलों में सक्रिय है।
इस प्रणाली के तहत 2023 से अब तक 11.46 लाख मामलों में से 7.86 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
इसके लिए 2023 से 2026 तक ₹998.43 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे गरीब और जरूरतमंदों को प्रभावी आपराधिक बचाव सहायता मिल रही है।


विधिक साक्षरता और न्यायालयों की भूमिका

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राज्य स्तरीय संस्थाओं ने 2022 से 2025 के बीच 13.83 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया है।
इन अभियानों ने करीब 15 करोड़ लोगों तक विधिक साक्षरता पहुंचाई है।
वहीं, देशभर में 865 फास्ट-ट्रैक कोर्ट और 725 विशेष न्यायालय, जिनमें 392 ‘पॉक्सो’ अदालतें शामिल हैं, सक्रिय रूप से मामलों के त्वरित निपटारे में लगे हैं।
इस योजना को मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है, जिसके लिए ₹1,952 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है।


ग्रामीण स्तर पर न्याय की नई पहल

गांवों में न्याय की सुलभता बढ़ाने के लिए 488 ग्राम न्यायालयों की स्थापना की गई है।
इसके साथ ही, नारी अदालतें (Nari Adalats) मिशन शक्त‍ि कार्यक्रम के अंतर्गत कई राज्यों में शुरू की जा रही हैं, ताकि महिलाओं के प्रति हिंसा के मामलों को समुदाय स्तर पर सुलझाया जा सके।
अंत में, इस अवसर पर देशभर में विधिक जागरूकता शिविरों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे न्याय प्रणाली और भी सशक्त बन सके।