रायपुर, 3 जुलाई 2026/ ETrendingIndia / India relaxes rules: Export of Nepal’s tea to India resumes… भारत द्वारा आयात नियमों में ढील दिए जाने के बाद लगभग दो महीने से रुका नेपाल की चाय का भारत को निर्यात फिर शुरू हो गया है।
भारतीय चाय बोर्ड की ओर से 1 मई से लागू किए गए कड़े आयात नियमों के कारण नेपाली चाय की खेप सीमा पर रुक गई थी। अब नीति में बदलाव के बाद 30 जून से चाय से लदे ट्रक फिर भारत पहुंचने लगे हैं।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि भारत ने आयात नीति की समीक्षा कर प्रक्रिया को आसान बनाया है। उन्होंने कहा कि भारत यात्रा के दौरान इस मुद्दे को भारतीय अधिकारियों के सामने भी उठाया गया था।
नेपाल चाय संघ के अध्यक्ष कमल मैनाली ने भी निर्यात दोबारा शुरू होने की पुष्टि की है।
नेपाल की जलवायु क्यों है चाय उत्पादन के लिए अनुकूल ?
नेपाल के पूर्वी और पहाड़ी क्षेत्रों में 600 से 2,000 मीटर की ऊंचाई, ठंडी जलवायु, पर्याप्त वर्षा, उपजाऊ मिट्टी और पहाड़ी ढलानें चाय की खेती के लिए आदर्श मानी जाती हैं।
यहां दिन और रात के तापमान में अंतर होने से चाय की पत्तियों का स्वाद और सुगंध बेहतर विकसित होती है। इसी कारण नेपाल की ऑर्थोडॉक्स चाय अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी खास पहचान रखती है।
नेपाल चाय की विशेषताएं
नेपाल में मुख्य रूप से ऑर्थोडॉक्स और सीटीसी (CTC) चाय का उत्पादन होता है। पूर्वी नेपाल के इलाम, झापा, पांचथर और धनकुटा जिले प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्र हैं। यहां बड़ी चाय बागानों के साथ हजारों छोटे किसान भी चाय की खेती करते हैं।
नेपाली चाय का बड़ा हिस्सा भारत के अलावा यूरोप, अमेरिका और जापान जैसे देशों में भी निर्यात किया जाता है।
भारत नेपाल की चाय का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ने से सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों और चाय उद्योग को भी लाभ मिलेगा।
