Share This Article नेपाल में भोटे कोशी नदी की अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद चीन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, बाढ़ का असर तिब्बत के केरुंग क्षेत्र में पहले ही दिखाई दे चुका था, लेकिन नेपाल को समय रहते इसकी जानकारी दी गई या नहीं, इसे लेकर अब बहस तेज हो गई है। तिब्बत से उठा सैलाब, नेपाल में मची तबाही रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत के केरुंग काउंटी में स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 10:30 बजे अचानक बाढ़ की स्थिति बनी। इसके बाद भोटे कोशी नदी में तेज जलप्रवाह नेपाल की ओर बढ़ा और सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही हुई। क्या चीन ने नेपाल को समय पर चेताया? सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर चीन की ओर बाढ़ की स्थिति की जानकारी पहले से थी, तो नेपाल को तत्काल चेतावनी क्यों नहीं दी गई? एक रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल को चीन की ओर से सूचना दोपहर करीब 1:35 बजे मिली, जबकि तब तक आपदा शुरू हो चुकी थी। पिछली बाढ़ के बाद भी नहीं बना प्रभावी अलर्ट सिस्टम यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पिछले साल भी तिब्बत से आई बाढ़ ने भोटे कोशी क्षेत्र में भारी नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद नेपाल और चीन के बीच अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत पर चर्चा हुई थी। आपदा की वजह पर भी जांच जारी विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार बाढ़ संभवतः ग्लेशियर या बर्फ-पत्थर के बड़े हिस्से के टूटने, भूस्खलन और नदी में अचानक मलबा आने से जुड़ी हो सकती है। हालिया रिपोर्टों में जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान को भी हिमालयी आपदाओं के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है। अब उठी मांग—सीमा पार बने मजबूत चेतावनी तंत्र नेपाल की इस त्रासदी ने एक बार फिर भारत-नेपाल-चीन हिमालयी क्षेत्र में रियल-टाइम नदी निगरानी, साझा डेटा और तत्काल आपदा चेतावनी व्यवस्था की जरूरत को सामने ला दिया है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि बाढ़ क्यों आई, बल्कि यह भी है कि क्या समय रहते लोगों को बचाया जा सकता था ? Share This Article Post navigation नेपाल में बाढ़ : पिघलते ग्लेशियरों से बढ़ा हिमालयी आपदा का खतरा… नेपाल बाढ़ आपदा : परिजनों के सहायता हेतु कंट्रोल रूम