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रायपुर, 20 अक्टूबर 2026। ETrendingIndia / इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अमेरिका में इजरायल के प्रति शत्रुतापूर्ण रुख रखने वाले राष्ट्रपति के सत्ता में आने की आशंका जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में अमेरिका का नेतृत्व बदलने से इजरायल के सामने नई रणनीतिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इस संभावित स्थिति से निपटने के लिए नेतन्याहू ने भारत और लैटिन अमेरिका के देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोगियों का दायरा बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।


नेतन्याहू ने अपनी सुरक्षा नीति पेश करते हुए कहा कि इजरायल को ट्रंप के कार्यकाल का उपयोग अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के साथ-साथ वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां विकसित करने में करना चाहिए। उन्होंने भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा कि इजरायल को अपने रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए अन्य देशों के साथ भी मजबूत संबंध स्थापित करने होंगे।


नेतन्याहू ने भविष्य में अमेरिकी प्रशासन के बदलने से पैदा होने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा, दो साल में कोई भी राष्ट्रपति, चाहे पुरुष हो या महिला, सत्ता में आ सकता है, जो इजरायल के प्रति बेहद शत्रुतापूर्ण हो। ऐसे में आप इससे कैसे निपटेंगे? आप अमेरिका के साथ अपने संबंधों को कैसे संभालेंगे? इसके अलावा, किन समाधानों की आवश्यकता होगी?


उन्होंने कहा कि इजरायल को आने वाले समय में अमेरिका के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। नेतन्याहू के अनुसार, अगले दो वर्षों के दौरान अमेरिकी राजनीतिक मंच पर सक्रिय रहना और अच्छे-बुरे दोनों तरह के हालात के लिए तैयारी करना इजरायल की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।


इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि वह वर्तमान में अपने क्षेत्र और उससे बाहर के कई देशों के साथ इस दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने भारत का उल्लेख करते हुए कहा, भारत कोई छोटा देश नहीं है और ऐसे कई अन्य देश भी हैं।


उनके इस बयान को इजरायल की विदेश नीति में विविधता लाने और अमेरिका पर रणनीतिक निर्भरता को संतुलित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। भारत के साथ मजबूत संबंध इजरायल को व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसर प्रदान कर सकते हैं।


नेतन्याहू ने लैटिन अमेरिकी देशों में हो रहे राजनीतिक बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़े परिवर्तन हो रहे हैं और ब्राजील में भी राजनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना है। उनके अनुसार, ऐसे घटनाक्रम इजरायल के लिए अपने सहयोगी देशों का दायरा बढ़ाने के अवसर बन सकते हैं।


उन्होंने जोर देकर कहा कि इजरायल को ऐसे गठबंधन विकसित करने चाहिए, जिनसे उसकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत हो और उसकी क्षमताएं दुनिया के अन्य देशों के लिए उपयोगी साबित हों। नेतन्याहू का मानना है कि विभिन्न देशों के साथ पारस्परिक हितों पर आधारित सहयोग इजरायल को भविष्य की राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है।


नेतन्याहू की इस चेतावनी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और जो बाइडन के साथ उनके तनावपूर्ण संबंधों की याद ताजा कर दी है। इजरायल के कई विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के बीच नेतन्याहू को लेकर बढ़ती नाराजगी के पीछे इजरायली प्रधानमंत्री के पिछले कुछ वर्षों के फैसले भी एक कारण रहे हैं।


सुरक्षा चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं के बावजूद नेतन्याहू के लिए ट्रंप के साथ घनिष्ठ संबंध उनकी राजनीतिक रणनीति का प्रमुख आधार बने हुए हैं। हालांकि, अमेरिकी राजनीति में संभावित बदलावों को लेकर उनकी चिंता यह संकेत देती है कि इजरायल भविष्य में अपने कूटनीतिक विकल्पों को व्यापक बनाने पर विचार कर रहा है।


इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले नेतन्याहू का यह रुख उनकी सुरक्षा और विदेश नीति की प्राथमिकताओं को भी सामने लाता है। भारत तथा लैटिन अमेरिका के देशों के साथ संबंध मजबूत करने की उनकी अपील का उद्देश्य बदलते वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में इजरायल के लिए अधिक व्यापक और स्थायी सहयोगी नेटवर्क तैयार करना है।


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