Cycad plants
A cycad tree, which is over 1,360 years old, is blooming in Nanning, China, on May 9, 2024. This ancient cycad flowers annually, creating a unique sight in the Cycad Garden, and it is also the oldest known ricodon cycad tree in China. (Photo by Costfoto/NurPhoto via Getty Images)
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रायपुर / ETrendingIndia / ओडिशा के साइकैड पौधों में मिला न्यूरोटॉक्सिन

ओडिशा के जंगलों में पाए जाने वाले प्राचीन साइकैड (Cycad) पौधों में खतरनाक न्यूरोटॉक्सिन BMAA (β-N-methylamino-L-alanine) की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। एम्स भुवनेश्वर ने सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि यह खोज सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकेत दे सकती है।

पारंपरिक भोजन में साइकैड का उपयोग चिंता का कारण

कुछ स्थानीय समुदाय अभी भी साइकैड आधारित भोजन जैसे ‘पिठा’ का सेवन करते हैं। यह पारंपरिक व्यंजन धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में प्रमुख रूप से शामिल रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि साइकैड में पाए जाने वाले BMAA जैसे न्यूरोटॉक्सिन लंबे समय में तंत्रिका तंत्र पर हानिकारक प्रभाव डाल सकते हैं।

एम्स भुवनेश्वर ने शुरू किया विषविज्ञान पर शोध

एम्स भुवनेश्वर ने साइकैड पौधों की विषाक्तता और पार्किंसनिज़्म, मोटर न्यूरॉन डिजीज, डिमेंशिया जैसे तंत्रिका रोगों के संभावित संबंधों पर शोध प्रारंभ किया है। इस विषय पर “Cycad-Related Neurological Disorders” शीर्षक से एक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला भी आयोजित की गई, जिसमें देश-विदेश के वैज्ञानिकों और चिकित्सकों ने भाग लिया।

साइकैड पौधों के खतरे और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन

कार्यशाला में बताया गया कि साइकैड प्रजातियाँ 300 मिलियन वर्ष पुरानी हैं और इनमें Cycacin, BMAA, और MAM जैसे शक्तिशाली विषैले तत्व पाए जाते हैं। इन तत्वों को पहले गुआम (अमेरिका) और कीई प्रायद्वीप (जापान) जैसे क्षेत्रों में न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों से जुड़ा पाया गया है।

विशेषज्ञों ने किए फील्ड विजिट और अध्ययन

शोध टीम ने खोरधा और ढेंकानाल जिलों में फील्ड विजिट कर स्थानीय ग्रामीणों और स्वास्थ्य कर्मियों से बातचीत की। इन दौरों के दौरान साइकैड बीजों के सेवन से होने वाली संभावित न्यूरोलॉजिकल समस्याओं को समझने का प्रयास किया गया।

निष्कर्ष

अंत में, यह अध्ययन ओडिशा के लोगों के लिए चेतावनी का संकेत है कि पारंपरिक खाद्य पदार्थों में छिपे न्यूरोटॉक्सिन के खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एम्स भुवनेश्वर की टीम अब इस पर विस्तृत विषविज्ञान विश्लेषण कर रही है।