Deep DepressionDeep Depression
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रायपुर, 24 सितंबर 2026। ETrendingIndia/ समुद्र में बने गहरे अवदाब के प्रभाव से ओडिशा के दक्षिणी और तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश का दौर जारी है। मलकानगिरी जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नदी-नाले उफान पर हैं और कई प्रमुख मार्गों पर बाढ़ का पानी भर गया है। जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-326 पर स्थित चार पुल पानी में डूब गए हैं। इन पुलों के ऊपर दो से तीन फीट तक पानी बह रहा है, जिससे कई इलाकों का आपसी संपर्क टूट गया है।


गहरे अवदाब का असर उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में सबसे अधिक दिखाई दे रहा है। तेज बारिश के साथ तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए हैं। कुछ स्थानों पर पुलों को भी नुकसान पहुंचा है। मलकानगिरी में पोटेरू, कांकुरुकोंडा, एमवी-96 और एमवी-90 पुलों पर बाढ़ का पानी आ जाने से यातायात बाधित हो गया है।


पहाड़ी इलाकों से लगातार पानी आने के कारण कांकुरुकोंडा, कन्याश्रम, एमवी-90 और एमवी-96 पुलों के ऊपर दो से तीन फीट तक पानी बह रहा है। इसके चलते मलकानगिरी का कालीमेला, मोटू और पोडिया क्षेत्रों से संपर्क प्रभावित हुआ है। पुलों के दोनों ओर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, ताकि लोगों को पानी के बीच से गुजरने से रोका जा सके।


भारी बारिश के कारण बायापाड़ा घाट पर भूस्खलन भी हुआ है। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने और जलभराव वाले मार्गों पर जाने से बचने की अपील की है।


गहरे अवदाब के कारण दक्षिणी और तटीय ओडिशा में बुधवार को हुई भारी बारिश के बाद प्रशासन ने कम से कम 3,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। मलकानगिरी जिले के लिए मौसम विभाग ने लाल चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने संभावित बाढ़ और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा है।


जिला प्रशासन की ओर से पुलों के दोनों तरफ फंसे यात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट बेदाबर प्रधान ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट ने पुल के दोनों तरफ रुकी गाडिय़ों में यात्रियों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। ट्रक और बस यात्रियों के लिए पके तथा सूखे भोजन की व्यवस्था की गई है।


अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट बेदाबर प्रधान ने बताया कि अगले कुछ घंटों में गहरे अवदाब के और तीव्र होने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह तैयार है। जरूरत पडऩे पर लोगों को चक्रवाती आश्रय स्थलों में ठहराने की व्यवस्था की गई है। कुछ वाहन सुकमा मार्ग की ओर भेजे गए हैं, जबकि अन्य यात्रियों के लिए भी आवश्यक व्यवस्था की जा रही है।


स्थानीय प्रशासन के अनुसार, जलस्तर बढऩे की स्थिति में प्रभावित लोगों के रहने और भोजन की व्यवस्था की गई है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सभी संबंधित दलों को सतर्क रखा गया है।


जिला मजिस्ट्रेट ने देर रात सुकमा चौक पहुंचकर बारिश और जलभराव की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान मलकानगिरी के पुलिस अधीक्षक और उप-जिला मजिस्ट्रेट सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों की समीक्षा की।


इसके बाद जिला मजिस्ट्रेट ने सुबह पटुरु पुल का भी निरीक्षण किया और वहां की स्थिति का जायजा लिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर मौजूद रहकर यातायात और राहत व्यवस्था की निगरानी की।


स्थानीय लोगों ने बताया कि लगातार बारिश के कारण क्षेत्र में स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन ने जलस्तर बढऩे की स्थिति में लोगों के लिए भोजन और सुरक्षित स्थानों की व्यवस्था की है। अधिकारियों के अनुसार, नए पुल के निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।


भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से गहरे अवदाब के ओडिशा-आंध्र प्रदेश तट की ओर बढऩे की चेतावनी के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य में खराब मौसम से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की थी। उन्होंने अधिकारियों को आपदा प्रबंधन में सरकार की ‘शून्य जनहानि’ नीति का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।


मौसम विभाग के अनुसार, गहरा अवदाब आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम से करीब 50 किलोमीटर, ओडिशा के गोपालपुर से लगभग 150 किलोमीटर और पुरी से करीब 250 किलोमीटर दूर था। इसके 23 सितंबर की रात तक विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच कलिंगपट्टनम के पास से उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को पार करने की संभावना जताई गई थी।


मौसम विभाग ने इसके प्रभाव से 23 और 24 सितंबर को तटीय आंध्र प्रदेश, यानम, ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ में और 24 तथा 25 सितंबर को तेलंगाना में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई थी।

मौसम विभाग के अनुसार, गहरा अवदाब कम दबाव वाले क्षेत्र से अधिक तीव्र मौसम प्रणाली होता है, लेकिन चक्रवाती तूफान की तुलना में कम तीव्र होता है। इस मौसम प्रणाली के प्रभाव से ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है। हालांकि, इस मौसम प्रणाली के चक्रवात में बदलने की संभावना नहीं जताई गई थी।


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