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रायपुर, 17 सितंबर 2026। ETrendingIndia / भारत ने पाकिस्तान और चीन के बीच गठित तथाकथित सीमा संयुक्त आयोग को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस आयोग का कोई कानूनी आधार नहीं है और भारत अपने क्षेत्र से जुड़े किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा।

भारत ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अपना अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताते हुए 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को भी फिर से अवैध और अमान्य करार दिया।

भारत ने आयोग को क्यों नकारा?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पाकिस्तान-चीन के तथाकथित सीमा संयुक्त आयोग को मान्यता नहीं देता। भारत के अनुसार, पाकिस्तान और चीन के बीच ऐसी कोई मान्य सीमा नहीं है, जिसे भारत स्वीकार करता हो।

1963 के समझौते पर भी आपत्ति

भारत ने दोहराया कि वह 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं देता रहा है। भारत इसे अवैध और अमान्य मानता है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर दो टूक

विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। भारत के अनुसार, पाकिस्तान को भारतीय क्षेत्रों से संबंधित किसी भी तरह की व्यवस्था करने का अधिकार नहीं है।

अवैध कब्जे को वैध बनाने की कोशिश मंजूर नहीं

भारत ने कहा कि भारतीय क्षेत्रों की स्थिति बदलने या कथित अवैध कब्जे को वैध ठहराने की किसी भी कोशिश का वह दृढ़ता से विरोध करेगा। ऐसी किसी व्यवस्था से भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

पाकिस्तान को भारत का संदेश

भारत ने पाकिस्तान से कहा कि ऐसी गतिविधियों के बजाय उसे भारतीय क्षेत्रों पर अपने अवैध और जबरन कब्जे वाले इलाकों को खाली करना चाहिए।


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