रायपुर 6 मार्च 2026/ ETrendingIndia / Birds in crisis: The size of birds is declining rapidly around the world / पक्षियों का घटता आकार , प्रकृति में आ रहे बड़े बदलावों के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। एक ताजा वैश्विक अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में पक्षियों का औसत आकार (Average Size) धीरे-धीरे छोटा होता जा रहा है।
शोधकर्ताओं ने चेताया है कि यदि पर्यावरण में गिरावट की यही गति रही, तो आने वाले दशकों में बड़े आकार के पक्षी केवल तस्वीरों तक ही सीमित रह जाएंगे।
बड़े पक्षियों पर विलुप्ति का खतरा
अध्ययन में 40 से अधिक स्थानों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बड़ी प्रजातियों की संख्या तेजी से घट रही है। शिकार और प्राकृतिक आवासों के छिन जाने के कारण विशालकाय पक्षी (जैसे गिद्ध, सारस और कुछ समुद्री पक्षी) विलुप्ति की कगार पर हैं, जबकि छोटी प्रजातियां अपनी संख्या बनाए रखने में अधिक सक्षम दिख रही हैं।
जलवायु परिवर्तन और ‘बर्गमैन का नियम’
वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग इस बदलाव का एक बड़ा कारण है। जीव विज्ञान के ‘बर्गमैन नियम’ के अनुसार, गर्म वातावरण में रहने वाले जीवों का शरीर अक्सर छोटा होता है क्योंकि छोटा शरीर गर्मी को तेजी से बाहर निकालने में मदद करता है।
जैसे-जैसे पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, पक्षी जीवित रहने के लिए खुद को छोटा (Shrink) कर रहे हैं।
हैबिटेट डिस्ट्रक्शन और मानवीय हस्तक्षेप
पक्षियों के छोटे होने के पीछे केवल जलवायु ही नहीं, बल्कि इंसानी दखल भी प्रमुख है:
वनों की कटाई:
बड़े पक्षियों को प्रजनन और भोजन के लिए बड़े पेड़ों और विस्तृत क्षेत्रों की जरूरत होती है, जो कटते जंगलों के कारण खत्म हो रहे हैं।
वन्यजीव व्यापार और शिकार:
मांस और व्यापार के लिए बड़े पक्षियों का शिकार छोटे पक्षियों की तुलना में कहीं अधिक किया जाता है।
मानव विस्तार:
शहरों के विस्तार ने पक्षियों के प्राकृतिक गलियारों को नष्ट कर दिया है।
पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ेगा गंभीर असर
पक्षियों के आकार में यह बदलाव केवल देखने तक सीमित नहीं है। बड़े पक्षी पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जैसे:
बीजों का प्रसार:
बड़े फल खाने वाले पक्षी ही बड़े पेड़ों के बीजों को दूर तक फैला सकते हैं। उनके गायब होने से जंगलों की विविधता कम हो जाएगी।
प्राकृतिक सफाई:
गिद्ध जैसे बड़े पक्षी मृत जानवरों को खाकर बीमारियों को फैलने से रोकते हैं।
यह अध्ययन एक स्पष्ट चेतावनी है कि हम न केवल प्रजातियों को खो रहे हैं, बल्कि जो जीवित हैं, वे भी बदलती परिस्थितियों के कारण शारीरिक रूप से कमजोर हो रहे हैं।
यह ‘बायोडायवर्सिटी लॉस’ का एक सूक्ष्म लेकिन विनाशकारी संकेत है।
