रायपुर, 19 दिसम्बर 2025/ ETrendingIndia / Emphasis on public awareness to prevent rabies: Contact helpline 1100 / रेबीज से बचाव , रेबीज एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर सही इलाज और टीकाकरण से इससे पूरी तरह बचाव संभव है। कुत्ता, बंदर, बिल्ली या किसी भी जानवर के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना बहुत जरूरी है। इसके बाद बिना देर किए एंटी-रेबीज वैक्सीन और जरूरत होने पर इम्यूनोग्लोबुलिन लगवाना चाहिए।
नागरिकों से अपील की गई है कि डॉग बाइट की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1100 पर संपर्क करें और अन्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए 104 हेल्पलाइन का उपयोग करें।
छत्तीसगढ़ के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और पशु काटने के मामलों में तुरंत मानक उपचार देने के निर्देश दिए गए है।
अस्पताल परिसरों में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए फेंसिंग, गेट और स्वच्छता व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया।
सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में रेबीज से बचाव और कुत्ते के काटने पर प्राथमिक उपचार से जुड़ी जानकारी वाले पोस्टर और ऑडियो-विजुअल सामग्री लगाई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जागरूकता और समय पर इलाज ही रेबीज से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
इस संदर्भ में राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत रायगढ़ जिले में रेबीज (जलांतक) से बचाव और प्रभावी उपचार को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें जिले के चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट और स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल हुए।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ मास्टर ट्रेनरों ने स्वास्थ्य कर्मियों को रेबीज के शुरुआती लक्षण, प्राथमिक उपचार, वैक्सीनेशन शेड्यूल, दवाओं का सही उपयोग, मरीज की रिपोर्टिंग और रेफरल प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
