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रायपुर, 10 अगस्त 2026 / ETrendingIndia / भारतीय रेल ने हरित परिवहन की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में 7 किलोवाट-पीक क्षमता वाले रूफटॉप सोलर सिस्टम से लैस सोलर-असिस्टेड यात्री कोच विकसित किया गया है। इससे कोच की बिजली जरूरतों के लिए पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटेगी, साथ ही हर साल हजारों यूनिट स्वच्छ बिजली और करीब ₹2.80 लाख की बचत होने का अनुमान है।

छत पर लगे सोलर पैनल से बनेगी बिजली

पायलट आधार पर एक आईसीएफ नॉन-एसी कोच की छत पर सोलर फोटोवोल्टिक पैनल लगाए गए हैं। ये पैनल सूर्य की रोशनी से सीधे बिजली बनाएंगे, जिसका इस्तेमाल कोच की बैटरी चार्ज करने में किया जाएगा। इससे लाइट, पंखे और मोबाइल चार्जिंग जैसी सुविधाओं के लिए बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

पारंपरिक व्यवस्था से कैसे अलग?

अभी पारंपरिक आईसीएफ कोचों में एक्सल से जुड़े अल्टरनेटर के जरिए बिजली पैदा होती है। यह व्यवस्था ट्रेन की गति पर निर्भर रहती है। सोलर सिस्टम में सूर्य की ऊर्जा का सीधे इस्तेमाल होने से इस निर्भरता को कम किया जा सकेगा।

सालाना ₹2.80 लाख तक की बचत

रेलवे के अनुसार, इस सोलर सिस्टम से एक कोच में हर साल करीब 13,400 यूनिट (kWh) स्वच्छ बिजली पैदा होने की उम्मीद है। इससे प्रति कोच करीब ₹2.80 लाख सालाना बचत हो सकती है।

11 टन घटेगा CO₂ उत्सर्जन

सोलर कोच से हर साल प्रति कोच लगभग 11 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। यानी यह प्रयोग रेलवे के ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण दोनों लक्ष्यों में मदद करेगा।

सफल रहा प्रयोग तो दूसरे कोचों में भी विस्तार

फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया है। इसके प्रदर्शन का आकलन करने के बाद अन्य यात्री कोचों में भी इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से अपनाने की योजना है।

भारतीय रेल का यह प्रयोग पारंपरिक कोचों को अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


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