The Raipur-Visakhapatnam economic corridor
The Raipur-Visakhapatnam economic corridor
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रायपुर 9 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / The Raipur-Visakhapatnam economic corridor will halve travel time and give a tremendous boost to development./ रायपुर विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर , रायपुर से विशाखापत्तनम के बीच बन रहा 464 किलोमीटर लंबा रायपुर –विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर पूरा होने के बाद यात्रा समय को लगभग आधा कर देगा। वर्तमान में यह सफर करीब 12 घंटे का है, जो घटकर 6–7 घंटे रह जाएगा। यह कारीडोर छह लेन, एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे 100 किमी प्रति घंटे की डिज़ाइन स्पीड के साथ तैयार किया जा रहा है।

NHAI की अहम परियोजना

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा विकसित इस परियोजना पर कुल ₹16,491 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। अब तक निर्माण कार्य 70 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है और अगले दो वर्षों में इसके चालू होने की संभावना है। यह कॉरिडोर मध्य भारत को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम बंदरगाह से जोड़ने वाला एक हाई-स्पीड लॉजिस्टिक मार्ग बनेगा।

छत्तीसगढ़ में पहला ‘इको-कॉरिडोर’

छत्तीसगढ़ में यह कॉरिडोर लगभग 125 किमी लंबा है, जिसे झांकी से मरांगपुरी तक तीन पैकेजों में विकसित किया जा रहा है। इस हिस्से पर करीब ₹4,146 करोड़ की लागत आ रही है। यह राज्य का पहला छह लेन ‘इको-कॉरिडोर’ होगा।

वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता

परियोजना की सबसे बड़ी खासियत 2.79 किमी लंबी ट्विन-ट्यूब टनल है, जो उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व के नीचे से गुजरेगी। इससे बाघ कॉरिडोर और वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। इसके अलावा 28 मंकी कैनोपी, धमतरी क्षेत्र में हाथियों के लिए 8 ओवरब्रिज और बाघ व भालू जैसे जीवों के लिए 19 एनिमल पासवे बनाए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों को लाभ

यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के धमतरी, कांकेर, बस्तर और कोंडागांव जैसे आदिवासी व आकांक्षी जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी देगा। साथ ही छत्तीसगढ़ और ओडिशा से लौह अयस्क व अन्य खनिजों के परिवहन को बंदरगाह तक आसान बनाएगा।

ईंधन की बचत, कम उत्सर्जन और तेज माल ढुलाई के साथ यह परियोजना छत्तीसगढ़ सहित आंध्र प्रदेश और ओडिशा के आर्थिक विकास को नई दिशा देगी।