Rajasthani paintingRajasthani painting
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 रायपुर, 21 अगस्त 2026/ ETrendingIndia / बीकानेर हाउस में चल रहे दस दिवसीय ‘तीजोत्सव-2026’ में राजस्थान की लोक संस्कृति और पारंपरिक खान-पान के साथ वहां की समृद्ध चित्रकला परंपरा भी लोगों का ध्यान खींच रही है। 24 अगस्त तक चलने वाले इस आयोजन में राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकार अपनी पारंपरिक कलाकृतियों के जरिए प्रदेश की कला और सांस्कृतिक विरासत को दिल्ली के लोगों तक पहुंचा रहे हैं।

प्रमुख आवासीय आयुक्त श्री रोहित कुमार ने बताया कि तीजोत्सव में राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से आए चित्रकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने और कलाकृतियों के विपणन के लिए मंच दिया गया है। मेले में बनी-ठनी, पिछवाई और अन्य पारंपरिक शैलियों में तैयार चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक तकनीकों से बनाई गई इन कलाकृतियों में राजस्थान के लोक जीवन, संस्कृति और कला की खास झलक देखने को मिलती है। बनी-ठनी और पिछवाई कला को जीवंत रख रहे पुष्पेंद्र साहू तीजोत्सव में राजस्थान के किशनगढ़ से आए चित्रकार श्री पुष्पेंद्र साहू भी अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह लगातार तीसरे वर्ष तीजोत्सव में हिस्सा ले रहे हैं। वह बनी-ठनी और पिछवाई शैली में चित्र बनाते हैं और अपने परिवार की दूसरी पीढ़ी के कलाकार के तौर पर इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ा रहे हैं। पुष्पेंद्र साहू के मुताबिक, पारंपरिक चित्रकला को तैयार करने में काफी समय और धैर्य लगता है। हर चित्र में बारीक काम किया जाता है, जिसके लिए कलाकार को लंबे समय तक एकाग्र होकर काम करना पड़ता है।

इसके अलावा इंद्रप्रस्थ कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के साथ करीब 40 विद्यार्थी भी मेले में पहुंचे। विद्यार्थियों ने राजस्थान की पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प को करीब से देखा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार ने भी मेले का दौरा किया और वहां मौजूद कलाकारों एवं आर्टिजंस से बातचीत कर उनका उत्साह बढ़ाया।


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