Share This Article अयोध्या, 20 सितंबर 2026। Ram Mandir Ayodhya : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पुजारियों और मंदिर सेवा से जुड़े कर्मचारियों के लिए नई आचार संहिता लागू की गई है। नई व्यवस्था में पूजा-पद्धति, शुचिता और अनुशासन से जुड़े कई नियम तय किए गए हैं। इसके तहत पुजारियों के लिए पीले वस्त्र, तिलक और पंचकेशी परंपरा का पालन अनिवार्य किया गया है। गर्भगृह में मोबाइल फोन, पर्स और अन्य निजी सामान ले जाने पर भी रोक लगाई गई है। पीले वस्त्र और तिलक के साथ पंचकेशी परंपरा जरूरी नई नियमावली के अनुसार रामलला समेत मंदिर परिसर के अन्य मंदिरों में सेवा करने वाले पुजारियों को निर्धारित वेशभूषा और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करना होगा। पीले वस्त्र धारण करने और तिलक लगाने के साथ पंचकेशी परंपरा का पालन भी अनिवार्य किया गया है। पुजारियों के बाल, दाढ़ी, मूंछ और शिखा से संबंधित व्यवस्था भी निर्धारित की गई है। नियमों का उद्देश्य मंदिर की पूजा-पद्धति और निर्धारित परंपराओं के अनुरूप सेवा व्यवस्था बनाए रखना है। गर्भगृह में मोबाइल और निजी सामान पर पूरी रोक नई आचार संहिता के तहत गर्भगृह में मोबाइल फोन, पर्स और अन्य निजी सामान ले जाने की अनुमति नहीं होगी। पूजा के दौरान मंदिर की ओर से उपलब्ध कराए गए भोग-प्रसाद के अलावा बाहर से किसी अन्य सामग्री को भी गर्भगृह में ले जाने पर रोक रहेगी। मंदिर प्रशासन की ओर से इस व्यवस्था के जरिए गर्भगृह की शुचिता और पूजा व्यवस्था को बनाए रखने पर जोर दिया गया है। ड्यूटी के दौरान स्नान और स्वच्छता के नियम भी तय पुजारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता को भी नई नियमावली में विशेष महत्व दिया गया है। ड्यूटी के दौरान शौच के लिए जाने वाले पुजारी को दोबारा मंदिर या गर्भगृह में प्रवेश से पहले स्नान करना होगा। इसके बाद निर्धारित नए वस्त्र धारण करके ही वह अपनी सेवा में लौट सकेंगे। इसके अलावा पुजारियों को निर्धारित समय और स्थान पर अपनी ड्यूटी निभानी होगी। सेवा के दौरान अनावश्यक बातचीत, समूह में चर्चा और हंसी-मजाक से बचने के निर्देश दिए गए हैं। सेवा स्थल छोड़ने से पहले पाली प्रमुख को देनी होगी सूचना नई व्यवस्था के मुताबिक, किसी आवश्यक कारण से पुजारी को अपना निर्धारित सेवा स्थल छोड़ना पड़ता है तो इसकी सूचना संबंधित पाली प्रमुख को देना जरूरी होगा। इस नियम के जरिए मंदिर में सेवा व्यवस्था को व्यवस्थित रखने और ड्यूटी के दौरान जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया गया है। भोग-प्रसाद से जुड़े काम देखने वाले कोठारी और भंडारी समेत अन्य मंदिर कर्मचारियों के लिए भी वेशभूषा, स्वच्छता और अनुशासन से संबंधित नियम निर्धारित किए गए हैं। नशे पर रोक, नियम तोड़ने पर कार्रवाई का प्रावधान मंदिर परिसर में सेवा देने वाले सभी कर्मचारियों को नशीले पदार्थों से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं। बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, तंबाकू और मद्यपान जैसी चीजों के सेवन पर कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। नई आचार संहिता में मंदिर की निर्धारित मर्यादा के उल्लंघन की स्थिति में शुद्धिकरण प्रक्रिया और आवश्यक कार्रवाई का भी प्रावधान है। बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य पूजा-पद्धति, सेवा व्यवस्था, शुचिता और अनुशासन को बनाए रखना है। Share This Article Post navigation Guru Vashisht Award : शिक्षा-शोध में योगदान के लिए मिला विशेष सम्मान…! डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता को ‘गुरुविशिष्ट’ सम्मान