Share This Article बीजिंग, 19 सितंबर 2026। Russia Sanctions Act 2026 : रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव बढ़ाने वाले नए कानून को लेकर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीन के विदेश मंत्रालय ने ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ का विरोध करते हुए कहा कि दूसरे देशों के साथ चीन का सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है और इसमें बाहरी दबाव या हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। चीन ने अमेरिका के कानून पर क्या कहा? चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह ऐसे एकतरफा प्रतिबंधों और ‘लॉन्ग-आर्म जूरिस्डिक्शन’ का विरोध करता है, जिनका अंतरराष्ट्रीय कानून में आधार नहीं है और जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी हासिल नहीं है। चीन ने कहा कि देशों के बीच सामान्य व्यापारिक सहयोग को किसी तीसरे देश के दबाव से बाधित नहीं किया जाना चाहिए। रूस से तेल-गैस खरीद पर 100% तक शुल्क अमेरिका के नए कानून में रूस से आयात होने वाले सामान पर 500% तक शुल्क लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ बड़े आयातक देशों से अमेरिका में आने वाले सामान पर 100% तक शुल्क लगाने का अधिकार भी दिया गया है। यह प्रावधान रूस की ऊर्जा आय को कम करने और यूक्रेन युद्ध के लिए उसके आर्थिक संसाधनों पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है। कानून में रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र के अलावा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले नेटवर्क और संस्थाओं को भी निशाना बनाया गया है। 100% टैरिफ हर देश पर अपने आप नहीं लगेगा कानून में 100% तक शुल्क लगाने की अधिकतम सीमा तय की गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि रूस से तेल खरीदने वाले हर देश पर स्वतः 100% शुल्क लागू हो गया है। संबंधित देशों और शुल्क दरों को लेकर अमेरिकी प्रशासन के पास निर्णय और समीक्षा की भूमिका है। कानून के तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में संबंधित देशों की स्थिति की समीक्षा कर सकता है और जरूरत के अनुसार सूची में बदलाव किया जा सकता है। चीन और भारत पर भी नजर रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों में चीन और भारत प्रमुख हैं। इसी वजह से नए अमेरिकी कानून के संभावित असर को लेकर दोनों देशों की व्यापार और ऊर्जा नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है। अमेरिकी कानून का घोषित उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव डालना है, जबकि चीन का कहना है कि सामान्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार को तीसरे देश की एकतरफा पाबंदियों से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। दोनों पक्षों के इन अलग-अलग रुख को लेकर आगे अमेरिकी प्रशासन के फैसले महत्वपूर्ण होंगे। Share This Article Post navigation Trump News : CNN, MS NOW और POLITICO पर व्हाइट हाउस में प्रवेश का बैन, ट्रंप ने कहा- फेक न्यूज