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ETrendingIndia रायपुर / स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने समग्र शिक्षा 2025 योजना के तहत शिक्षा क्षेत्र में एक नया कदम उठाया। यह योजना, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप है, प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक समग्र और समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखती है। इसका उद्देश्य सभी बच्चों को उनकी विविध पृष्ठभूमि, भाषाई जरूरतों और शैक्षणिक क्षमताओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में बताया कि यह योजना हर बच्चे को सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाएगी।

समग्र शिक्षा 2025 के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसमें मुफ्त वर्दी, पाठ्यपुस्तकें, विशेष प्रशिक्षण, और स्कूल न जाने वाले बच्चों के लिए आवासीय शिविर शामिल हैं। इसके अलावा, योजना नए स्कूलों की स्थापना, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के उन्नयन, और पीएम-जनमन जैसे कार्यक्रमों के तहत जनजातीय क्षेत्रों में छात्रावास निर्माण को बढ़ावा देती है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए ब्रेल किट, सहायक उपकरण, और बाधा-मुक्त स्कूल सुविधाएं जैसे रैंप और शौचालय भी इस योजना का हिस्सा हैं। साथ ही, शिक्षक प्रशिक्षण को मजबूत करने के लिए ‘निष्ठा’ कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, समग्र शिक्षा 2025 डिजिटल शिक्षा पर जोर देती है। आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लासरूम, और पीएम ई-विद्या जैसे पहल ग्रामीण-शहरी अंतर को पाट रहे हैं। न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (एनआईएलपी) या ‘उल्लास’ 15 साल से अधिक उम्र के निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए काम कर रहा है, जिसमें 2.20 करोड़ शिक्षार्थी और 40 लाख स्वयंसेवी शिक्षक ‘उल्लास’ ऐप पर पंजीकृत हैं।

यह योजना बुनियादी ढांचे जैसे स्कूल भवन, प्रयोगशालाएं, और पुस्तकालयों के निर्माण में भी सहायता करती है। समग्र शिक्षा 2025 के जरिए भारत शिक्षा में समानता और गुणवत्ता की ओर बढ़ रहा है, जो बच्चों के भविष्य को सशक्त बनाएगा।