Share This Article रायपुर, 18 अक्टूबर 2026 / ETrendingIndia / मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों से निपटने के लिए इजरायल की मदद लेने की सलाह दी है। ट्रंप ने कहा कि इजरायल सऊदी अरब के लिए काफी मददगार साबित हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सऊदी अरब भविष्य में अब्राहम समझौते में शामिल हो सकता है। उनके इस बयान को इजरायल और सऊदी अरब के बीच राजनयिक संबंध सामान्य बनाने की कोशिशों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के खिलाफ इजरायल की ओर से दिए गए सहयोग के प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए। इस पर उन्होंने सहमति जताते हुए इजरायल की सहायता को सऊदी अरब के लिए लाभकारी बताया। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अब्राहम समझौते में सऊदी अरब की भागीदारी की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। वर्ष 2020 में शुरू हुए अब्राहम समझौतों का उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाना था। ट्रंप ने सऊदी अरब के इस समझौते में शामिल होने को लेकर बातचीत दोबारा शुरू होने के सवाल पर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि समझौते में सऊदी अरब की भागीदारी की संभावना शायद पहले से कहीं अधिक है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे अपने कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में से एक बताया। हालांकि, इजरायल के साथ संबंध सामान्य बनाने को लेकर सऊदी अरब ने लंबे समय से एक महत्वपूर्ण शर्त रखी है। रियाद का कहना है कि फिलिस्तीनी राष्ट्र के गठन की दिशा में स्पष्ट और विश्वसनीय रास्ता तय किए बिना इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से पहले इजरायल और सऊदी अरब के बीच संबंध सामान्य बनाने को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी। लेकिन हमास के हमले और उसके बाद गाजा में शुरू हुए युद्ध ने क्षेत्रीय परिस्थितियों को बदल दिया। फिलिस्तीनी मुद्दा भी दोनों देशों के बीच संभावित समझौते की दिशा में एक प्रमुख विषय बना हुआ है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी मध्य पूर्व में अपने देश की भूमिका को लेकर बयान दिया है। मंगलवार को इजरायली मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में उनसे पूछा गया कि क्या सऊदी अरब ने इजरायल से सहायता मांगी है। रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने कहा कि मध्य पूर्व में शायद ही कोई ऐसा देश होगा, जो इजरायल से मदद नहीं मांग रहा हो। हालांकि, उनके बयान से यह स्पष्ट नहीं हुआ कि सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ किसी विशेष सैन्य सहायता के लिए औपचारिक अनुरोध किया है या नहीं। ऐसे में सऊदी अरब और इजरायल के बीच संभावित सहयोग की वास्तविक स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आना बाकी है। इस बीच, ईरान ने सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों में अपनी भूमिका होने के आरोपों को खारिज कर दिया है। ईरान के सरकारी प्रसारक की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने में मदद करने की इच्छा भी जताई है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि यदि सभी संबंधित पक्ष अनुरोध करते हैं, तो ईरान तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने के प्रयासों में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों के अनुभव से स्पष्ट है कि विदेशी हस्तक्षेप और नाकेबंदी से यमन की समस्या का समाधान नहीं निकल सकता। बघाई के मुताबिक, यमन के लोगों ने ब्रिटेन और अमेरिका की ओर से लागू की गई नाकेबंदी का लंबे समय तक सामना किया है। उन्होंने क्षेत्रीय देशों से मौजूदा तनाव समाप्त करने के लिए प्रयास करने की अपील की। मध्य पूर्व में हूती विद्रोहियों, सऊदी अरब, इजरायल और ईरान से जुड़े घटनाक्रम के बीच ट्रंप का बयान क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनयिक संबंधों को लेकर नई चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इजरायल के साथ संभावित सहयोग और अब्राहम समझौते में शामिल होने को लेकर अंतिम रुख स्पष्ट होना अभी बाकी है। Share This Article Post navigation रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ नहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने कानून रोका