रायपुर 30 जनवरी 2026 / ETrendingIndia / संघर्षों से भरा रहा सविता पुनिया पद्मश्री सम्मान का सफर
सविता पुनिया पद्मश्री सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उनके संघर्षों की पहचान है। उन्होंने एक छोटे शहर सिरसा से अपना सफर शुरू किया। पहले संसाधन कम थे, लेकिन हौसला मजबूत था। इसलिए उन्होंने हार नहीं मानी।
भारतीय हॉकी की ‘दीवार’ बनीं सविता
सविता पुनिया को भारतीय महिला हॉकी की ‘दीवार’ कहा जाता है। उन्होंने 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। यह उपलब्धि उन्हें देश की पहली महिला गोलकीपर के रूप में खास बनाती है। इसके अलावा कई अहम टूर्नामेंट में उन्होंने टीम को जीत दिलाई।
परिवार का साथ बना सबसे बड़ी ताकत
सविता बताती हैं कि उनका परिवार हर मुश्किल में साथ खड़ा रहा। जब हालात कठिन थे, तब भी परिवार ने हौसला बढ़ाया। इस कारण उनका आत्मविश्वास बना रहा। सविता पुनिया पद्मश्री सम्मान उनके परिवार के त्याग का भी सम्मान है।
यादों से भरा पल, देश के लिए गर्व का क्षण
पद्मश्री मिलने की खबर ने उन्हें भावुक कर दिया। उन्होंने कहा कि पूरा सफर आंखों के सामने घूम गया। पहले संघर्ष था, फिर मेहनत और अंततः सफलता मिली। निष्कर्षतः सविता पुनिया पद्मश्री सम्मान भारतीय खेल जगत के लिए गर्व का क्षण है।
