रायपुर 17 नवंबर 2025 /ETrendingIndia / Creamy layer should be implemented in SC also / SC में क्रीमी लेयर लागू , एजेंसी। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री बी आर गवई ने रविवार को कहा कि वे अब भी इस विचार के पक्ष में हैं कि अनुसूचित जातियों (एससी) को मिलने वाले आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ यानी आर्थिक -सामाजिक रूप से आगे बढ़ चुके वर्ग को बाहर किया जाना चाहिए।
एक कार्यक्रम ‘इंडिया एंड द लिविंग इंडियन कॉस्टिटट्यूशन ऐट 75 इयर्स’ में आईएएस अफसर के बच्चे और गरीब किसान मजदूर के बच्चों को एक ही स्तर पर नहीं रखा जा सकता। उनका कहना था कि आरक्षण का लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
सीजेआई गवई ने बताया कि उन्होंने अतीत में भी इंद्रा साहनी (मंडल आयोग) मामले के आधार पर यही राय दी थी कि जैसे ओबीसी समुदाय में क्रीमी लेयर की पहचान की जाती है, वैसे ही यह व्यवस्था एससी समुदाय के लिए भी होनी चाहिए, भले ही इस विचार की काफी आलोचना हुई हो। उन्होंने मुस्कराकर कहा कि न्यायाधीशों को आम तौर पर अपने फैसलों का बचाव नहीं करना चाहिए और मेरे पास सेवानिवृत्ति तक सिर्फ एक हफ्ता ही बचा है।
SC में क्रीमी लेयर लागू , महिलाओं और समानता पर बदलता भारत : सीजेआई ने कहा कि देश में वर्षों के दौरान महिलाओं के अधिकारों और समानता को लेकर जागरूकता बढ़ी है, और भेदभाव की पुरानी सोच को पीछे छोड़ा जा रहा है। उन्होंने भावुक होकर याद किया कि उनके कार्यकाल का पहला कार्यक्रम महाराष्ट्र के अपने गृह नगरे अमरावती में था और आख़री कार्यक्रम आंध्र प्रदेश के अमरावती में, मानो उनकी यात्रा एक पूरा चक्र पूरा कर रही हो।
संविधान ने बदली लाखों की जिंदगी – मेरा भी सफर इसका उदाहरण : मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि संविधान की वजह से ही आज भारत में दो राष्ट्रपति अनुसूचित जाति से हुए हैं और वर्तमान राष्ट्रपति एक अनुसूचित जनजाति की महिला हैं। अपनी यात्रा याद करते हुए उन्होंने कहा, अर्ध-झुग्गी जैसे इलाके और नगरपालिका स्कूल में पढ़ने वाला एक बच्चा भी जब देश की सर्वोच्च न्यायिक कुर्सी तक पहुंच सकता है, तो यह संविधान की ही ताकत है।
