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रायपुर / 03 नवंबर 2026 / ETrendingIndia / अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग जलविद्युत परियोजना को लेकर विरोध के बीच पुरस्कार विजेता लेखिका सुबी ताबा ने सरकार से स्थानीय आदिवासी समुदायों की चिंताओं को गंभीरता और संवेदनशीलता से सुनने की अपील की है।

उनका कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतें महत्वपूर्ण हैं, लेकिन विकास के नाम पर लोगों की पुश्तैनी जमीन, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

विस्थापन और संस्कृति खत्म होने का डर

न्यीशी जनजातीय समुदाय से आने वाली सुबी ने कहा कि परियोजना से प्रभावित लोगों को गांवों के डूबने, कृषि भूमि खत्म होने, पर्यावरणीय नुकसान और पारंपरिक जीवनशैली प्रभावित होने की आशंका है। हिमालयी क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता भी चिंता का बड़ा कारण है।

पारदर्शिता और बातचीत जरूरी

उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार परियोजना से संबंधित व्यवहार्यता अध्ययन, पर्यावरणीय आकलन और विस्थापन के आंकड़े सार्वजनिक करे। साथ ही स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन और प्रभावित समुदायों से सार्थक बातचीत होनी चाहिए।

विकास का हो मानवीय चेहरा

सुबी ने स्पष्ट किया कि वह विकास के विरोध में नहीं हैं। अरुणाचल को बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है। लेकिन विकास संबंधी फैसलों में स्थानीय लोगों की सहमति और सम्मान को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

उनका कहना है कि आदिवासियों के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी परंपराओं, इतिहास और सांस्कृतिक पहचान का आधार है।


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