Share This Article

रायपुर 23 जनवरी 2026/ ETrendingIndia / Space changed her thinking, a sense of belonging to India: Sunita Williamson’s inspiring journey / सुनीता विलियम्सन प्रेरक सफर , नासा की पूर्व अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्सन ने कहा है कि अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने के बाद इंसानों के बीच आपसी मतभेद और टकराव बेमानी लगने लगते हैं।

सभी लोग एक-दूसरे से जुड़े हैं, सहयोग ही मानवता का असली रास्ता

उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी को एक ही ग्रह के रूप में ऊपर से देखा जाता है, तो यह एहसास होता है कि सभी लोग एक-दूसरे से जुड़े हैं और सहयोग ही मानवता का असली रास्ता है।

करीब 60 वर्षीय सुनीता विलियम्सन ने कहा कि भारत आना उन्हें घर लौटने जैसा महसूस होता है। उनके अनुसार अब समय आ गया है कि अगली पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपी जाए और उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान व अनुसंधान के लिए तैयार किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि अंतरिक्ष यात्रा का उद्देश्य सिर्फ पहले पहुंचना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जो भी अंतरिक्ष में जाए, वह लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।

अनुशासन, टीमवर्क और धैर्य ने हर चुनौती को आसान बनाया

सुनीता विलियम्सन ने अंतरिक्ष यात्रा के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे कई महीनों तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर रहीं। इस दौरान उन्होंने कठिन परिस्थितियों में काम किया, लेकिन अनुशासन, टीमवर्क और धैर्य ने हर चुनौती को आसान बना दिया।

उन्होंने माना कि अंतरिक्ष में डर जैसी भावना भी होती है, खासकर जब यह चिंता हो कि कहीं किसी छोटी गलती से किसी और को नुकसान न पहुंच जाए।

रिटायरमेंट के दौरान नासा ने उनके योगदान की सराहना की। वे नासा की उन चुनिंदा अंतरिक्ष यात्रियों में रहीं, जिन्होंने लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहकर वैज्ञानिक प्रयोगों और मिशनों को सफल बनाया। अंतरिक्ष स्टेशन पर फंसे रहने के अनुभव ने उन्हें मानसिक रूप से और मजबूत किया।

भारत यात्रा के दौरान सुनीता विलियम्सन की मुलाकात दिवंगत अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की मां से भी हुई। यह मुलाकात भावुक रही और पुरानी यादें ताजा हो गईं।

विज्ञान, साहस और सकारात्मक सोच से इंसानी सोच की सीमाएं पार की जा सकती हैं

सुनीता विलियम्सन का जीवन यह संदेश देता है कि विज्ञान, साहस और सकारात्मक सोच से न केवल अंतरिक्ष, बल्कि इंसानी सोच की सीमाएं भी पार की जा सकती हैं।