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रायपुर, 11 सितंबर 2026। ETrendingIndia / सुप्रीम कोर्ट ने कामकाज की जगहों पर अत्यधिक भीड़भाड़ को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि सैकड़ों लोगों को आने-जाने की पर्याप्त व्यवस्था के बिना एक ही कमरे में छोटी समुद्री मछलियों की तरह ठूंसकर रखना बेहद चिंताजनक स्थिति है। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी और 12 लोग घायल हुए थे।


न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि वह मामले को दिल्ली हाई कोर्ट से अपने पास स्थानांतरित नहीं करेगी। पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई पहले से जारी है और कार्यवाही प्रगति पर है, इसलिए इसे सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने का कोई आधार नहीं है।


इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा न्यायालय मित्र के रूप में अदालत की सहायता कर रहे हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के पास सत्य निकेतन में छात्रों के लिए भुगतान आधारित अतिथि आवास के रूप में इस्तेमाल की जा रही पांच मंजिला इमारत रविवार दोपहर करीब 1.30 बजे ढह गई थी। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 लोग घायल हुए थे।
हादसे के बाद दिल्ली में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास चल रहे भुगतान आधारित अतिथि आवास, निजी छात्रावास और अन्य छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मौजूदा व्यवस्था को बाधित नहीं करना चाहता। दिल्ली हाई कोर्ट अपने पहले दिए गए निर्देशों के पालन की निगरानी करता रहेगा। पीठ ने न्यायालय मित्र के सुझावों को स्वीकार करते हुए कहा कि हाई कोर्ट के समक्ष चल रही कार्यवाही की स्थिति में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।


पीठ ने हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि वह मामले की कम से कम समय में निगरानी करे और सुरक्षा से जुड़े निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करे।
न्यायालय मित्र अजीत कुमार सिन्हा ने अदालत को बताया कि उन्हें मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली नगर निगम हाई कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों पर कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि केवल भुगतान आधारित अतिथि आवास ही चिंता का विषय नहीं हैं, बल्कि व्यायामशाला, प्रशिक्षण केंद्र और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी गंभीर सवाल खड़े करती है।


उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान उनके कनिष्ठ सहयोगी एक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफेसर के साथ मौजूद थे। दक्षिण दिल्ली के सैदुलाजाब क्षेत्र में कुछ इमारतों में करीब 500 लोगों के काम करने की जानकारी सामने आई। अदालत के यह पूछने पर कि इन स्थानों पर किस तरह का काम होता है, न्यायालय मित्र ने बताया कि इनमें भर्ती केंद्र, ग्राहक सेवा केंद्र, साक्षात्कार स्थल और प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं।


सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि दिल्ली नगर निगम ने मामले में कई कदम उठाए हैं और आवश्यकता पडऩे पर वह भी विस्तृत रिपोर्ट दाखिल कर सकता है।


इस पर पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मामले में चीजें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित प्राधिकरणों से 15 सितंबर तक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।


पीठ न्यायालय मित्र की ओर से दाखिल एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। आवेदन में सत्य निकेतन इमारत हादसे के बाद दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास स्थित सभी भुगतान आधारित अतिथि आवास, निजी छात्रावास और अन्य छात्र आवासों का निरीक्षण तथा सुरक्षा परीक्षण कराने की अनुमति मांगी गई थी।


न्यायालय मित्र की रिपोर्ट में कहा गया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए निरीक्षण का दायरा उन क्षेत्रों से आगे बढ़ाना उचित होगा, जिन्हें अदालत ने पहले चिन्हित किया है। रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों से दिल्ली भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के अंदर तथा आसपास मौजूद भुगतान आधारित अतिथि आवास, निजी छात्रावास और अन्य छात्र आवासों का समयबद्ध निरीक्षण और सुरक्षा परीक्षण कराने की सिफारिश की गई है।


न्यायालय मित्र की सहायता अधिवक्ता गोविंद जी ने की। अब सभी संबंधित प्राधिकरणों की रिपोर्ट सामने आने के बाद अदालत इस मामले में आगे की दिशा तय करेगी।


सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि चिंता केवल सत्य निकेतन जैसे छात्र आवासों तक सीमित नहीं है। अत्यधिक भीड़ वाले कार्यालयों, प्रशिक्षण केंद्रों, भर्ती केंद्रों और अन्य व्यावसायिक परिसरों में आग, भवन सुरक्षा और आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी की व्यवस्था भी न्यायालय के संज्ञान में है।


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब दिल्ली में ऐसे स्थानों के निरीक्षण और सुरक्षा मानकों के पालन पर संबंधित प्राधिकरणों की जवाबदेही बढ़ गई है।


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