the Swachh Vayu Survekshan the Swachh Vayu Survekshan
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 रायपुर, 07 सितंबर / ETrendingIndia / स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कारों में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने देशभर के शहरों में पहला स्थान हासिल किया है। मध्य प्रदेश के इंदौर को दूसरा और जबलपुर को तीसरा स्थान मिला है। ‘नीले गगन के लिए स्वच्छ हवा के अंतरराष्ट्रीय दिवसÓ के अवसर पर सोमवार को नई दिल्ली स्थित पर्यावरण भवन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों और वार्डों को सम्मानित किया गया।


पुरस्कार राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार ने अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी में प्रदान किए। विजेता शहरों के जिलाधिकारी, महापौर और संबंधित अधिकारियों ने पुरस्कार ग्रहण किए।


स्वच्छ वायु सर्वेक्षण एक बहुस्तरीय मूल्यांकन व्यवस्था है, जिसके तहत शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों का विस्तृत आकलन किया जाता है। यह पहल राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम का हिस्सा है और इसके तहत देश के 130 शहरों के बीच हर वर्ष मूल्यांकन किया जाता है।


इसका उद्देश्य शहरों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रोत्साहित करना है।


श्रेणी-1 में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों का मूल्यांकन किया गया। इस श्रेणी में लखनऊ ने पहला, इंदौर ने दूसरा और जबलपुर ने तीसरा स्थान हासिल किया। श्रेणी-2 में तीन से 10 लाख की आबादी वाले शहर शामिल किए गए। इस श्रेणी में ओडिशा के राउरकेला ने पहला स्थान हासिल किया। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद को दूसरा और आंध्र प्रदेश के गुंटूर को तीसरा स्थान मिला। महाराष्ट्र के अमरावती को भी शीर्ष प्रदर्शन करने वाले शहरों में स्थान मिला।


श्रेणी-3 में तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों का मूल्यांकन किया गया। इसमें ओडिशा के कलिंग नगर ने पहला स्थान हासिल किया।
सर्वेक्षण में शहरों के साथ-साथ अलग-अलग आबादी वाले वार्डों के प्रदर्शन का भी आकलन किया गया।


श्रेणी-1 में 30 हजार से अधिक आबादी वाले 10 सर्वश्रेष्ठ वार्डों में लखनऊ के वार्ड संख्या 70 ने पहला स्थान हासिल किया। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का वार्ड संख्या 60 दूसरे और महाराष्ट्र के नासिक का वार्ड संख्या 7 तीसरे स्थान पर रहा। श्रेणी-2 में 10 हजार से 30 हजार की आबादी वाले वार्ड शामिल किए गए। इसमें भुवनेश्वर के वार्ड संख्या 30 और 36 ने शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके बाद आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा का वार्ड संख्या 60 और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का वार्ड संख्या 31 रहा।


वहीं, श्रेणी-3 में 10 हजार से कम आबादी वाले वार्डों का मूल्यांकन किया गया। इसमें ओडिशा के राउरकेला का वार्ड संख्या 13 पहले स्थान पर रहा। तेलंगाना के नलगोंडा का वार्ड संख्या 16 दूसरे और असम के नगांव का वार्ड संख्या 8 तीसरे स्थान पर रहा।


पुरस्कार के साथ विजेता शहरों को नकद राशि भी प्रदान की गई। संबंधित जिलाधिकारियों, महापौरों और अन्य अधिकारियों ने पुरस्कार ग्रहण किए। पुरस्कार के रूप में मिली राशि का इस्तेमाल शहरों में स्वच्छ वातावरण और वायु गुणवत्ता सुधारने से जुड़े प्रयासों को और मजबूत करने के लिए किया जाएगा। समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि यह पुरस्कार देश के विभिन्न शहरों और वार्डों की ओर से वायु गुणवत्ता बनाए रखने तथा सूक्ष्म कण पीएम-10 और पीएम-2.5 के स्तर को निर्धारित मानकों तक लाने के प्रयासों को सम्मानित करने का अवसर है।


उन्होंने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और सुविधाओं के निर्माण के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी आगे बढ़ाया जा सकता है। न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने कहा कि आर्थिक विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। वास्तविक लक्ष्य ऐसा विकास होना चाहिए, जिसमें लोगों के जीवन की गुणवत्ता बनी रहे। उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा जीवन की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण आधार है और यह पर्यावरण से जुड़ी कोई विलासिता नहीं, बल्कि बुनियादी आवश्यकता है।


न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने कहा कि मनुष्य भोजन और पानी के बिना कुछ समय तक जीवित रह सकता है, लेकिन स्वच्छ हवा के बिना कुछ मिनट भी रहना संभव नहीं है। उन्होंने ऐसे वातावरण का लक्ष्य रखने की बात कही, जहां बच्चे वायु प्रदूषण के डर के बिना खुले मैदान में खेल सकें, बुजुर्ग बिना स्वास्थ्य संबंधी खतरे के सुबह की सैर कर सकें और मजदूर तथा कामगार बिना प्रदूषण से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं की चिंता के अपना काम कर सकें।


उन्होंने कहा कि मानव जीवन और पर्यावरणीय तत्वों, विशेषकर पानी और हवा की शुद्धता के बीच संतुलन कायम करना बेहद जरूरी है।
न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने कहा कि वायु प्रदूषण किसी राजनीतिक या प्रशासनिक सीमा को नहीं मानता। यह किसी राज्य, शहर या वार्ड तक सीमित नहीं रहता। इसके स्रोत भी अलग-अलग हैं।


उन्होंने वाहनों से होने वाले प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण और निर्माण तथा तोडफ़ोड़ से निकलने वाले मलबे को वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में बताया। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों और कारकों को ध्यान में रखते हुए ही प्रभावी समाधान तलाशना होगा।
न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने कहा कि केवल नई तकनीक अपनाने से वायु प्रदूषण की समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं किया जा सकता। इसके लिए नागरिकों के व्यवहार में बदलाव लाना भी जरूरी है।


उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में जन-जागरूकता को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, यदि प्रत्येक नागरिक पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझे और उसके अनुरूप व्यवहार करे, तो पर्यावरण संरक्षण के लिए अलग से कई उपाय करने की आवश्यकता कम हो सकती है।


केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार ने कहा कि मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप काम कर रहा है। उन्होंने समयबद्ध तरीके से काम करने, विभिन्न प्रयासों को एक साथ जोडऩे और सभी पक्षों को साथ लेकर नागरिकों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने के लिए सामूहिक प्रयास करने पर जोर दिया।


उन्होंने कहा कि दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनके अनुसार, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को यह स्पष्ट रूप से समझना होगा कि वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कौन से प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए और किस दृष्टिकोण के साथ काम किया जाना चाहिए।


उन्होंने कहा कि सही दिशा और समन्वित प्रयासों के बिना स्वच्छ हवा का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।


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