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रायपुर, 3 नवंबर 2026 / ETrendingIndia / गादेन नामग्याल ल्हात्से (तवांग मठ) में शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आस्था और श्रद्धा का एक महत्वपूर्ण अवसर बन गई है।

प्रदर्शनी में तवांग और अरुणाचल प्रदेश के निकटवर्ती क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनी के पहले तीन दिनों में मठ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

पवित्र अवशेषों के दर्शन, पूजा-अर्चना और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं।

श्रद्धालुओं का उमड़ना भगवान बुद्ध और उनकी शाश्वत शिक्षाओं के प्रति लोगों की गहरी आस्था एवं श्रद्धा दर्शाती है।

यह प्रदर्शनी बौद्ध भिक्षुओं, वरिष्ठ नागरिकों और आम लोगों के लिए सुलभ है, जिससे श्रद्धालुओं को पवित्र अवशेषों के दर्शन करने, उनके समक्ष श्रद्धा अर्पित करने और उनके आध्यात्मिक महत्व का अनुभव प्राप्‍त करने का अवसर मिल रहा है।

इससे लोगों को भगवान बुद्ध के करुणा, शांति, प्रज्ञा और सार्वभौमिक बंधुत्व के शाश्वत संदेश से पुनः जुड़ने का दुर्लभ अवसर मिला है।

पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी के साथ ही वहां आने वाले लोगों को दो विशेष प्रदर्शनियों से बौद्ध सभ्यता की समृद्ध विरासत और उसके विविध आयामों को जानने का अवसर मिल रहा है।

पवित्र स्‍थल पिपरहवा की खोज :

भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की कहानी और उनकी खोज शीर्षक प्रदर्शनी का आयोजन अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ ने किया है।

इसमें पिपरहवा के अवशेषों के पुरातात्विक इतिहास को दर्शाया गया है। साथ ही, वर्ष 1898 में इन अवशेषों की खोज और बौद्ध इतिहास में उनके महत्व को भी रेखांकित किया गया है।

एक अन्य प्रदर्शनी धम्म के संगम स्थल : शास्त्रीय विरासत, जीवंत कला और मानवशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य का संयोजन नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय ने किया है। इस प्रदर्शनी में बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक, कलात्मक और सांस्कृतिक विकास को दिखाया गया है।

ये दोनों प्रदर्शनियां आगंतुकों को बौद्ध धर्म की समृद्ध और चिरस्थायी विरासत को गहनता से समझने का अवसर प्रदान कर रही हैं।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू ने नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय से लाए गए शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों का ऐतिहासिक तवांग मठ में विधिवत स्वागत किया।

इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ ही श्रद्धेय बौद्ध भिक्षु, धार्मिक प्रणेता और श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस समारोह के साथ ही राज्य में पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ।

शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी 7 नवंबर, 2026 तक तवांग मठ में जारी रहेगी।

इसके बाद, पवित्र अवशेषों को टीजीएल मठ (लोअर गोम्पा), बोमडिला ले जाया जाएगा, जहां 8 से 13 नवंबर, 2026 तक श्रद्धालु उनके दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे।

इसके बाद 14 से 20 नवंबर, 2026 तक यह प्रदर्शनी नामसाई स्थित गोल्डन पैगोडा में आयोजित की जाएगी।

पवित्र अवशेषों को 21 नवंबर, 2026 को नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में वापस पहुंचाया जाना निर्धारित है।


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