the 5th and 8th-grade examinations
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रायपुर, 06 जून 2026/ ETrendingIndia / “The ‘No Detention’ provision in the 5th and 8th-grade examinations should be scrapped: Chhattisgarh Principals Federation submitted 8 proposals to bring reforms in education.” छत्तीसगढ़ प्राचार्य फेडरेशन जिला रायपुर की आज हुई बैठक में विद्यालयों के सुचारु संचालन, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और प्राचार्यों एवं शिक्षण संस्थाओं से संबंधित महत्वपूर्ण समस्याओं एवं मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रांतीय कोषाध्यक्ष श्रीमती चमेली वर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में निम्नलिखित प्रस्तावों एवं मांगों पर सर्वसम्मति से सहमति प्रदान की गई —

कक्षा 5वीं एवं 8वीं के परीक्षा परिणामों में नो डिटेंशन पॉलिसी (कोई अनुत्तीर्ण नहीं) के प्रावधान को समाप्त किया जाए।

विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुरूप स्टाफ सेटअप का पुनरीक्षण एवं संशोधन किया जाए। वर्ष 2008 के बाद से इस संबंध में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

आर.एम.एस.ए. (RMSA) विद्यालयों में लिपिक, भृत्य, स्वीपर एवं चौकीदार के पद स्वीकृत किए जाएं।

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों को पूर्ववत आकस्मिक मद से ₹20,000 तक व्यय करने की अनुमति प्रदान की जाए।

तिमाही, छमाही एवं स्थानीय परीक्षाओं के आयोजन का अधिकार पूर्व की भांति प्राचार्यों को दिया जाए।

मिशन उत्कर्ष की समीक्षा बैठकों में अधिकारियों द्वारा संरक्षक एवं सहयोगी की भावना के साथ समस्याओं के समाधान हेतु मार्गदर्शन प्रदान किया जाए।

सभी स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में वाणिज्य एवं कला संकाय प्रारंभ किए जाएं।

कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के दिन ही समस्त सेवानिवृत्ति देयकों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा पी.पी.ओ. (PPO) भी उसी दिन जारी किया जाए।

बैठक में जिला अध्यक्ष डॉ. भारती अग्रवाल, प्रांतीय प्रमुख सलाहकार श्री अनुराग ओझा, प्रांतीय संयुक्त सचिव श्री आई. जे. विंद एवं श्रीमती सरिता यासरे, श्री रविशंकर होता, डॉ. वंदना अग्रवाल, श्रीमती शीला तुलानी, श्रीमती फाखरा खानम दानी, श्रीमती पापिया बनर्जी, श्रीमती रजनी मिंज, श्रीमती रोमिला एक्का तथा श्री हीरालाल वैष्णव सहित अनेक प्राचार्यों की सक्रिय एवं सराहनीय उपस्थिति रही।

फेडरेशन के सचिव धर्मेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने शासन एवं शिक्षा विभाग से उपर्युक्त मांगों पर सकारात्मक पहल करते हुए शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया, जिससे विद्यालयों के संचालन में सुधार एवं शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।