TI Suspended: Negligence in a case involving a minor proves costly; TI and ASI suspended following strict action by SP Ankita Sharma.TI Suspended News
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राजनांदगांव, 07 सितम्बर। TI Suspended News : छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में नाबालिग बालिका से जुड़े अपराध के मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। गैंदाटोला थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश साहू और सहायक उप निरीक्षक मेघनाथ सिन्हा को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने यह कार्रवाई मामले में कथित लापरवाही और संवेदनशीलता की कमी को लेकर की है। निलंबन अवधि में दोनों पुलिस अधिकारियों को रक्षित केंद्र राजनांदगांव से संबद्ध किया गया है।

नाबालिग से जुड़े मामले में सामने आई लापरवाही

गैंदाटोला थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका से जुड़े अपराध की सूचना मिलने के बाद पुलिस की कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में आई। प्राथमिक स्तर पर मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने थाना प्रभारी और ASI के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों से जुड़े गंभीर मामलों में सूचना मिलने के बाद तत्काल और संवेदनशील तरीके से कार्रवाई करना जरूरी है।

SDOP को सौंपी गई जांच, 7 दिन में रिपोर्ट

मामले की प्राथमिक जांच की जिम्मेदारी डोंगरगांव SDOP मंजूलता बाज को सौंपी गई है। उन्हें पूरे प्रकरण की जांच कर 7 दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की, किस स्तर पर लापरवाही हुई और संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही, इन सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।

रक्षित केंद्र से संबद्ध किए गए दोनों अधिकारी

निलंबन आदेश के बाद TI राजेश साहू और ASI मेघनाथ सिन्हा को निलंबन अवधि के दौरान रक्षित केंद्र राजनांदगांव से संबद्ध किया गया है। अब SDOP की जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की विभागीय कार्रवाई तय होगी। जांच में यदि अन्य स्तर पर भी लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा सकती है।

SP की कार्रवाई से पुलिस विभाग में सख्त संदेश

इस कार्रवाई के जरिए पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने गंभीर अपराधों, विशेषकर नाबालिगों से जुड़े मामलों में लापरवाही को लेकर सख्त रुख का संकेत दिया है। फिलहाल विभाग की प्राथमिकता मामले की निष्पक्ष जांच और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को स्पष्ट करना है। सात दिनों में जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह पता चलेगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।


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