President Donald TrumpPresident Donald Trump
Share This Article

रायपुर / ETrendingIndia / शांति समझौते से पहले बड़ा कदम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वाशिंगटन डी.सी. स्थित यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस पर अपना नाम जोड़कर नया विवाद खड़ा कर दिया। इसके अलावा, यह कदम उस समय सामने आया जब ट्रम्प रवांडा और कांगो के राष्ट्रपतियों की मेजबानी करने वाले थे। फिर भी, ट्रम्प प्रशासन ने इस बदलाव को “देश के इतिहास के सबसे बड़े डीलमेकर” को सम्मान देने वाला कदम बताया।


भवन पर नाम लगने के बाद बयानबाज़ी तेज

स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा कि नामकरण इसलिए किया गया क्योंकि ट्रम्प ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके तुरंत बाद, ट्रम्प ने विदेश मंत्री मार्को रूबियो को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह उनके लिए “सम्मान की बात” है। हालांकि, इस कदम ने संस्थान की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
इसके साथ ही, संस्थान लगभग नौ महीनों से प्रशासनिक उथल-पुथल का सामना कर रहा है।


प्रशासनिक विवाद और कानूनी लड़ाई जारी

मार्च में ट्रम्प की सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) ने संस्थान के कर्मचारियों को हटाकर खुद का नेतृत्व बैठा दिया था। हालांकि, एक संघीय जज ने इसे “सत्ता का दुरुपयोग” बताते हुए अवैध करार दिया। लेकिन, इसके बाद अपील अदालत ने उस फैसले पर रोक लगा दी।
इस कारण, अधिकांश कर्मचारी दोबारा बेरोजगार हो गए और भवन लगभग खाली पड़ा है। इसलिए, केवल कुछ परिचालन कर्मचारी ही अब वहां मौजूद हैं।


संस्थान के स्वरूप पर भी छिड़ा विवाद

ट्रम्प यूएस पीस इंस्टिट्यूट , संस्थान के विकिपीडिया पेज में संशोधन कर उसे “एक्जीक्यूटिव ब्रांच का समर्थन करने वाला संस्थान” लिखा गया। हालांकि, यह तथ्य गलत है। क्योंकि यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस को कांग्रेस ने 1984 में एक स्वतंत्र गैर-लाभकारी संस्था के रूप में बनाया था।
अंततः, यह सवाल कि राष्ट्रपति को कर्मचारियों को हटाने का अधिकार है या नहीं—अभी अदालत में विचाराधीन है।


कुल मिलाकर विवाद और गहराया

कुल मिलाकर, ट्रम्प यूएस पीस इंस्टिट्यूट विवाद शांति समझौते से पहले चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। इसके अलावा, कानूनी जटिलताओं के कारण मामले का समाधान अभी स्पष्ट नहीं है।


Share This Article