TS Singh Deo's sharp remarks... ranging from the Jhiram Ghati verdict to the Ram Mandir dispute; he also spoke on Naxalism and the 2028 elections.TS Singh Deo
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रायपुर, 05 सितंबर। TS Singh Deo : छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में झीरम घाटी मामले से लेकर राम मंदिर, कर्नाटक की राजनीति, नक्सलवाद, स्वाइन फ्लू और कांग्रेस के संगठनात्मक प्रशिक्षण समेत कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने झीरम घाटी मामले में एनआईए अदालत के फैसले पर कहा कि घटना को लेकर सच्चाई सामने है, लेकिन यह तय होना जरूरी है कि आखिर घटना क्यों घटने दी गई और इसकी जवाबदेही किसकी थी।

झीरम घाटी मामले पर बोले टीएस सिंह देव- जवाबदेही तय होनी चाहिए

झीरम घाटी मामले में एनआईए अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएस सिंह देव ने कहा कि सच्चाई सामने है। उनके मुताबिक, केवल घटनाक्रम को जानना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी पता लगना चाहिए कि इतनी बड़ी घटना क्यों घटने दी गई। उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय होने के बाद ही आगे की तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।

उन्होंने इस मामले में घटना के पीछे की परिस्थितियों और जिम्मेदारी तय करने की जरूरत पर जोर दिया। झीरम घाटी कांड छत्तीसगढ़ की राजनीति में आज भी एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।

राम मंदिर के चढ़ावे पर टिप्पणी, बोले- ‘सच्चाई सामने आ चुकी है’

राम मंदिर के नए CEO के उस बयान पर भी टीएस सिंह देव ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें जल्द ही सच्चाई सामने आने की बात कही गई थी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अब कौन-सी सच्चाई सामने आनी बाकी है। सिंह देव ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि उनके अनुसार इस संबंध में सच्चाई सामने आ चुकी है, हालांकि पूरी जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है।

कर्नाटक CM डीके शिवकुमार को ‘डमी CM’ कहने पर दिया जवाब

कर्नाटक में विपक्ष के नेता आर. अशोक द्वारा मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को ‘डमी सीएम’ बताए जाने पर टीएस सिंह देव ने उनका बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के मुताबिक डीके शिवकुमार एक प्रभावी मुख्यमंत्री हैं और लोगों के हित तथा कल्याण से जुड़े फैसले लेते हैं।

सिंह देव ने कहा कि डीके शिवकुमार फ्रंटफुट पर खेलने वाले नेताओं में से हैं। उनके मुताबिक, राजनीति में सक्रिय और प्रभावी तरीके से काम करने वाला व्यक्ति ‘डमी’ नहीं हो सकता।

VHP के गरबा बयान और हल्द्वानी FIR पर भी बोले सिंह देव

विश्व हिंदू परिषद की ओर से गरबा आयोजनों में मुस्लिमों के प्रवेश को लेकर दिए गए बयान और तिलक को अनिवार्य किए जाने की बात पर भी टीएस सिंह देव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हर संगठन को संविधान और कानूनी दायरे में रहते हुए अपनी विचारधारा व्यक्त करने का अधिकार है। हालांकि उन्होंने विदेश और देश में अलग-अलग तरह की बातें किए जाने की स्थिति को स्वीकार नहीं करने की बात कही।

हल्द्वानी प्रकरण में भाजपा नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज होने पर सिंह देव ने कहा कि ऐसे मामले में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। उन्होंने घटना को निंदनीय बताया।

नक्सलवाद, स्वाइन फ्लू और 2028 चुनाव पर भी खुलकर रखी बात

राज्य में नक्सलवाद खत्म होने के दावों पर टीएस सिंह देव ने सावधानी बरतने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने हथियार डाले हैं, उनके बारे में यह दावा नहीं किया जा सकता कि उनकी विचारधारा भी समाप्त हो गई है। उनके मुताबिक, सरकार के सामने चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि यह विचारधारा दोबारा हिंसक रूप न ले। इसके लिए सतर्कता और लगातार प्रयास जरूरी हैं।

स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों पर उन्होंने कहा कि यह समस्या सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में भी मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग पर पूरी तरह सवाल उठाने से इनकार करते हुए कहा कि चिकित्सकों के मुताबिक मौजूदा स्थिति पहले की तुलना में उतनी खतरनाक नहीं है।

कांग्रेस के संगठनात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लेकर सिंह देव ने कहा कि यह पार्टी की नई कार्यशैली का हिस्सा है। जिला कांग्रेस अध्यक्षों के बाद अब ब्लॉक अध्यक्षों का प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों को सीधे चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि समय-समय पर सामने आने वाले मुद्दों को जनता के बीच प्रभावी तरीके से रखने की रणनीति पर भी प्रशिक्षण में चर्चा होगी।

2028 के विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर पूछे गए सवाल पर टीएस सिंह देव ने कहा कि अभी इस बारे में कुछ तय नहीं है और 2028 अभी काफी दूर है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह ठीक हैं।

मंत्री पद छोड़ने के फैसले पर भी किया खुलासा

टीएस सिंह देव ने अपने मंत्री पद से पीछे हटने के फैसले पर कहा कि उस समय प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने की गति को लेकर वह संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने कहा कि इसी वजह से उन्हें एक मंत्री के रूप में खुद को सफल महसूस नहीं हो रहा था और उन्होंने कदम पीछे खींचने का फैसला किया।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के आंकड़ों में अंतर का मुद्दा भी उठाया। सिंह देव के मुताबिक, केंद्र सरकार संसद में करीब 9 लाख घर बनने की बात कह रही है, जबकि राज्य सरकार का दावा 18 लाख घरों का है। उन्होंने कहा कि इस अंतर की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने माना कि जब वह मंत्री पद पर थे, उस समय आवास निर्माण की गति धीमी थी।


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