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रायपुर ,12 फरवरी 2026/ ETrendingIndia / तुर्की संसद में संग्राम , तुर्की की संसद लोकतंत्र के मंदिर के बजाय बुधवार, 11 फरवरी को अखाड़े में तब्दील हो गई। कैबिनेट फेरबदल के दौरान न्याय मंत्रालय में एक विवादास्पद चेहरे की नियुक्ति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद आपस में भिड़ गए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि माननीय सदस्य मर्यादा भूल बैठे और एक-दूसरे पर लात-घूंसे बरसाने लगे।

सोशल मीडिया पर अब तेजी से वायरल हो चुके वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि यह हिंसा किसी एक-दो सांसद तक सीमित नहीं थी, बल्कि दर्जनों सांसदों की भीड़ इस धक्का-मुक्की और मारपीट में शामिल थे।

शपथ ग्रहण रोकने पर मचा बवाल


इस पूरे बवाल की मुख्य वजह इस्तांबुल के मुख्य अभियोजक (चीफ प्रॉसिक्यूटर) अकिन गुरलेक की नियुक्ति है, जिन्हें राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने देश का नया न्याय मंत्री बनाया है।

दरअसल, विपक्षी सांसद गुरलेक को संसद में शपथ लेने से रोकने की कोशिश कर रहे थे, जिसके चलते तनाव बढ़ा और नौबत हाथापाई तक आ गई।

विपक्ष का आरोप है कि इस्तांबुल के चीफ प्रॉसिक्यूटर के रूप में गुरलेक ने मुख्य विपक्षी दल ‘रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टीÓ के कई सदस्यों के खिलाफ राजनीति से प्रेरित हाई-प्रोफाइल मुकदमों की सुनवाई की थी। अब उसी व्यक्ति को न्याय मंत्री बनाए जाने से विपक्ष में भारी आक्रोश है।

मेयर की गिरफ्तारी और राजनीतिक तनाव

एर्दोगन सरकार ने न्याय मंत्री के अलावा पूर्वी प्रांत एर्जुरम के गवर्नर मुस्तफा सिफ्टसी को भी आंतरिक मंत्री नामित किया है। यह हंगामा ऐसे समय में हुआ है जब रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी के नियंत्रण वाली नगर पालिकाओं के सैकड़ों अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। इनमें इस्तांबुल के मेयर एक्रेम इमामोग्लू भी शामिल हैं, जिन्हें एर्दोगन का मुख्य प्रतिद्वंद्वी माना जाता है और पिछले साल गिरफ्तार किया गया था।

हालांकि, सरकार का लगातार यह कहना है कि न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से काम करती है और इन गिरफ्तारियों में कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है।

संवैधानिक सुधारों के बीच विवादास्पद नियुक्तियां

मंत्रालय में अचानक किए गए इन बदलावों के लिए कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। सरकारी राजपत्र में केवल इतना कहा गया कि मौजूदा मंत्रियों ने अपने कर्तव्यों से मुक्त होने का अनुरोध किया था। तुर्की में ये नई और विवादास्पद नियुक्तियां ऐसे नाजुक वक्त में हुई हैं जब देश में संभावित संवैधानिक सुधारों पर बहस चल रही है और दशकों से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (क्क्य्य) के साथ शांति पहल की कोशिशें की जा रही हैं।