Share This Article नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026।UAE LPG Supplier : मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बीच भारत के एलपीजी आयात के समीकरण बदल गए हैं। पिछले छह महीनों से भारत को रसोई गैस की सबसे ज्यादा आपूर्ति करने वाले अमेरिका को पीछे छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) एक बार फिर सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बन गया है। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में भारत के कुल एलपीजी आयात में यूएई की हिस्सेदारी बढ़कर 39 प्रतिशत हो गई, जबकि अगस्त में यह केवल 13 प्रतिशत थी। UAE से एलपीजी आपूर्ति में 182% की बढ़ोतरी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में यूएई ने भारत को 5.47 लाख टन एलपीजी की आपूर्ति की। अगस्त में यह मात्रा 1.93 लाख टन थी। इस तरह एक महीने में यूएई से एलपीजी आपूर्ति में 182 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही यूएई ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत के सबसे बड़े एलपीजी सप्लायर का स्थान हासिल कर लिया। अमेरिका की हिस्सेदारी घटकर 23 प्रतिशत सितंबर में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता रहा। अगस्त में अमेरिका ने भारत को 3.23 लाख टन एलपीजी भेजी थी, लेकिन सितंबर में उसकी आपूर्ति 58 प्रतिशत घट गई। भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी भी अगस्त के 53 प्रतिशत से गिरकर सितंबर में 23 प्रतिशत रह गई। भारत की एलपीजी जरूरत का 60% आयात से पूरा भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है। इसमें से पहले करीब 90 प्रतिशत आपूर्ति खाड़ी देशों से हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती थी। सितंबर में कुवैत और कतर से भी भारत का एलपीजी आयात बढ़ा। कुवैत तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा, जबकि कतर उसके बाद रहा। हालांकि, सितंबर में भारत का कुल एलपीजी आयात अगस्त की तुलना में 4 प्रतिशत घटकर 13.9 लाख टन रह गया। बाधाओं के बावजूद तेल आपूर्ति में सुधार केप्लर के अनुसार, मध्य पूर्व से तेल का प्रवाह भी युद्ध-पूर्व स्तर के करीब पहुंच रहा है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में इस क्षेत्र से दैनिक तेल प्रवाह युद्ध-पूर्व स्तर के लगभग 92 प्रतिशत तक पहुंच गया। खाड़ी से बाहर निकलने वाली तेल की मात्रा और वैकल्पिक मार्गों से भेजी जा रही खेपों ने आपूर्ति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। जहाजों और पाइपलाइनों से मिल रही मदद विश्लेषकों के मुताबिक, तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही में सुधार के पीछे जहाजों को अमेरिकी सैन्य सहायता के साथ एस्कॉर्ट किया जाना, सुपर टैंकरों के जरिए तेल का परिवहन और समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल स्थानांतरित करने की व्यवस्था जैसे कारण हैं। इसके अलावा, खाड़ी देश हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करने के लिए पाइपलाइनों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इन व्यवस्थाओं से क्षेत्रीय बाधाओं के बावजूद तेल और गैस की आपूर्ति को संभालने में मदद मिल रही है। Share This Article Post navigation SEBI New Rule 2026 : बॉन्ड निवेशकों के लिए नया क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर लागू करेगा सेबी, रंगों से समझ आएगा जोखिम