Share This Article रायपुर, 02 सितंबर /ETrendingIndia / World Coconut Day: नारियल का कोई हिस्सा बेकार नहीं, लकड़ी से लेकर कोकोपीट तक, जानें हर हिस्से का उपयोगनारियल कई सारे न्यूट्रिशन से भरा हुआ सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद फल है। नारियल के इसी गुण और महत्व को बताने के लिए भारत सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों में हर साल 2 सितंबर को विश्व नारियल दिवस मनाया जाता है। विश्व नारियल दिवस दुनिया के सबसे उपयोगी प्राकृतिक उत्पादों में शामिल नारियल के आर्थिक, कृषि और सामाजिक महत्व को बताता है। विश्व नारियल दिवस 2026 की थीम “अनिश्चितता के समय में नारियल: भोजन, ऊर्जा और आजीविका की सुरक्षा” है। यह थीम बताती है कि बदलते वैश्विक हालात में नारियल खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा और रोजगार के लिए कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। वहीं, देखा जाए तो नारियल केवल एक फल नहीं बल्कि लाखों किसानों और ग्रामीण परिवारों की आजीविका का आधार है। नारियल के पेड़ का लगभग हर हिस्सा किसी न किसी काम आता है। नारियल पानी का इस्तेमाल ताजगी देने वाले पेय के रूप में होता है जबकि नारियल के गूदे से दूध और तेल तैयार किया जाता है। नारियल तेल खाना पकाने के साथ-साथ साबुन, क्रीम, सौंदर्य प्रसाधन और बालों की देखभाल से जुड़े उत्पादों में भी इस्तेमाल होता है। इस दिवस का उद्देश्य नारियल के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ नारियल क्षेत्र में निवेश, अनुसंधान, नवाचार और उद्योग के विकास को प्रोत्साहित करना है। दुनिया के लगभग 80 देशों में नारियल की खेती की जाती है और इसकी करीब 150 किस्में बताई जाती हैं। नारियल का तना और लकड़ी घरों, फर्नीचर और नावों के निर्माण में इस्तेमाल होती है। नारियल के छिलके और रेशे यानी कोयर से रस्सियां, जाल, चटाइयां, ब्रश और दरवाजे के पायदान बनाए जाते हैं। नारियल के छिलके से तैयार बोर्ड का इस्तेमाल फर्नीचर और कुछ औद्योगिक उत्पादों में भी किया जाता है। नारियल का भूसा यानी कोकोपीट आधुनिक कृषि में भी उपयोगी है।इसे हाइड्रोपोनिक खेती और पौधों को उगाने के लिए माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ऑर्किड और मशरूम जैसी फसलों के उत्पादन में भी इसका उपयोग किया जाता है। वहीं, नारियल के खोल से तैयार सक्रिय कार्बन पानी साफ करने वाले फिल्टर में काम आता है। नारियल के फायदे नारियल में फाइबर के साथ विटामिन सी, ई और बी समूह के कुछ विटामिन तथा आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और जिंक जैसे खनिज पाए जाते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नारियल पानी को आपात परिस्थितियों में शरीर में तरल की कमी पूरी करने के लिए सलाइन के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किए जाने की घटनाएं भी दर्ज हैं। Share This Article Post navigation ईरान युद्ध के बीच पहली बार प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन की बिश्केक में मुलाकात