रायपुर 18 नवम्बर 2025/ ETrendingIndia / Sheikh Hasina sentenced to death: Bangladesh formally requests India’s extradition request, citing 2013 treaty / शेख हसीना प्रत्यर्पण मांग , बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सज़ा सुनाए जाने के कुछ घंटों बाद ही बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत से उनकी तत्काल वापसी की औपचारिक मांग की है।
सोमवार को बांग्लादेश ने भारत से अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को तुरंत सौंपने का अनुरोध किया।
बांग्लादेश की इस सीधी मांग पर भारत के विदेश मंत्रालय ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। भारत ने अपने बयान में शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया।
विदेश मंत्रालय ने कहा, “एक करीबी पड़ोसी होने के नाते हम बांग्लादेश में शांति, लोकतंत्र, समावेशिता और राजनीतिक स्थिरता सहित वहां के लोगों के सर्वोत्तम हितों के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम बांग्लादेश में सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक रूप से बातचीत करेंगे।”
क्या है 2013 की प्रत्यर्पण संधि और इसका ‘पेंच’?
भारत और बांग्लादेश के बीच 28 जनवरी 2013 को ढाका में लागू हुई प्रत्यर्पण संधि का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद, उग्रवाद और संगठित अपराध से निपटना है। यह संधि उन अपराधों के लिए प्रत्यर्पण की अनुमति देती है जिनमें न्यूनतम सजा एक वर्ष से अधिक हो और वह कृत्य दोनों देशों में दंडनीय (Dual Criminality) माना जाता हो; 2016 में एक संशोधन ने प्रक्रिया को सरल बनाते हुए केवल गिरफ्तारी वारंट को पर्याप्त बना दिया था। हालांकि, इस संधि में कुछ महत्वपूर्ण अपवाद भी हैं, विशेषकर अनुच्छेद 6 और 7 के तहत, जो इस मामले में अहम हो सकते हैं।
संधि स्पष्ट करती है कि राजनीतिक अपराधों या धार्मिक अपराधों के लिए प्रत्यर्पण नहीं किया जा सकता। इसके अतिरिक्त, यदि भारत (उत्तरदायी देश) यह मानता है कि प्रत्यर्पण की मांग “राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित” है या “अच्छे विश्वास” से नहीं की गई है, तो वह अनुरोध को अस्वीकार कर सकता है। यह संधि (दोहरी सजा का निषेध) के कानूनी सिद्धांत का भी सम्मान करती है, जिसका अर्थ है कि यदि व्यक्ति पर उसी अपराध के लिए पहले ही मुकदमा चल चुका हो, तो उसे दोबारा प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता।
