Share This Article सुनहरी लहरों पर झिलमिल धूप,उतर रहा है जैसे सांझ का रूप । ताड़ का पेड़ खड़ा मौन सा प्रहरी,निहार रहा है नभ का रंग सिंदूरी । हवा में घुली है शांति की बात,झांझ तरिया कहे —तनिक ठहर जाओ मेरे साथ ।। दिन का उजाला सिमटने लगा,सपनों का आकाश चमकने लगा । हर लहर में है कविता की तान,प्रकृति गा रही जैसे सुदंर गान । सुरमई शाम का यह पल है ‘अमोल’,नवा रायपुर में थम गया है भूगोल ।। ( छायांकन- श्री अमोल गुप्ता ) ETrendingIndia Share This Article Post navigation रायपुर साहित्य उत्सव : नवा रायपुर में 23 से 25 जनवरी तक होगा नई दिल्ली में ‘क्राफ्टेड फॉर द फ्यूचर’ प्रदर्शनी का शुभारंभ