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रायपुर, 21 दिसम्बर 2025 / ETrendingIndia / Technology, hard work and proper guidance have transformed the face of farming: Mr. Satish Pathak has become an example of self-reliance / तकनीक आधारित खेती , खेती अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि तकनीक और समझ से किया जाने वाला लाभकारी व्यवसाय बन रही है। छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार की योजनाओं का सही उपयोग कर कोण्डागांव जिले के केशकाल विकासखंड के ग्राम बहीगांव निवासी श्री सतीश पाठक ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक खेती अपनाकर किसान न सिर्फ आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा भी बन सकता है।

50 वर्षीय श्री सतीश पाठक ने सीमित शैक्षणिक संसाधनों के बावजूद सीखने की ललक को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। हाई स्कूल तक शिक्षा प्राप्त श्री पाठक पहले पारंपरिक खेती करते थे, जिसमें मेहनत अधिक और लाभ सीमित था। लेकिन शासन की तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने उनकी सोच बदल दी।

राष्ट्रीय बागवानी मिशन और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने 2.275 हेक्टेयर भूमि में ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाकर टमाटर की खेती शुरू की। आधुनिक तकनीकों, उन्नत बीज और वैज्ञानिक पद्धति का परिणाम यह हुआ कि जहाँ पहले उन्हें लगभग 100 क्विंटल उत्पादन मिलता था, वहीं आज उत्पादन बढ़कर 180 क्विंटल तक पहुँच गया है।

उत्पादन बढ़ने के साथ लागत घटी और गुणवत्ता सुधरी। इसका सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ा। श्री पाठक को अब सब्जी उत्पादन से प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख 35 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हो रहा है। यह उनकी मेहनत के साथ-साथ शासन की योजनाओं की सफलता का भी प्रमाण है।

वे अपनी भूमि में टमाटर के साथ-साथ बरबट्टी, खीरा और करेला जैसी सब्जियों की खेती कर रहे हैं। वे फसल चक्र, समय पर सिंचाई, रोग-कीट प्रबंधन और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर खेती की योजना बनाते हैं।

उनकी सफलता देखकर आसपास के कई किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर उद्यानिकी और सब्जी उत्पादन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। श्री पाठक न केवल सफल किसान बने हैं, बल्कि गांव में मार्गदर्शक की भूमिका भी निभा रहे हैं। वे अन्य किसानों को उन्नत बीज चयन, तकनीकी खेती और फसल प्रबंधन की जानकारी देकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।