Tasar farming changed his fortune
Tasar farming changed his fortune
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रायपुर, 11 जनवरी 2026/ ETrendingIndia / Tasar farming changed his fortune: Exploring the forests and understanding the intricacies of tasar silkworm farming became Bharat Ram Kewat’s strength / तसर पालन से सफलता , कोरबा जिले के ग्राम सलोरा के 57 वर्षीय किसान श्री भरत राम केवट ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों की राह में बाधा नहीं बन सकते। तसर रेशम उत्पादन को अपनाकर उन्होंने न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि गांव के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने हैं।

कृषि प्रधान परिवार में जन्मे श्री केवट का बचपन संघर्षों में बीता। कच्चे मकान और सीमित खेती से होने वाली आय में परिवार का गुजारा मुश्किल था। लेकिन पिता से मिली तसर पालन की सीख उनके जीवन की दिशा तय करने वाली साबित हुई। बचपन में जंगलों में जाकर तसर कीट पालन की बारीकियां समझना आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

1980 के दशक में उन्होंने केंद्रीय रेशम बोर्ड के रामपुर (अब चंपा) प्रशिक्षण केंद्र से विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाते हुए स्वच्छता, नियमित निगरानी और रोग प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया। वर्षों की मेहनत और अनुभव ने उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले तसर कोकून उत्पादन में दक्ष बना दिया।

लगभग 33 वर्षों के अनुभव के साथ श्री केवट आज उत्कृष्ट उत्पादक के रूप में पहचाने जाते हैं। बीएसएमटीसी बिलासपुर से प्राप्त 145 डीएफएल पर उन्होंने अपेक्षा से कहीं बेहतर उत्पादन किया। तसर पालन से उन्हें वर्ष में दो फसलें मिलती हैं, जिससे करीब ढाई लाख रुपये की वार्षिक आय हो रही है।

तसर पालन से सफलता , इस आय से उन्होंने बच्चों की शिक्षा, बेटों-बेटियों के विवाह, तीन पक्के मकान, पशुधन और तालाब निर्माण जैसे सपने पूरे किए। इतना ही नहीं, उन्होंने अनुबंध आधारित मछली पालन भी शुरू किया।

श्री केवट की सफलता यहीं नहीं रुकी। उन्होंने 8–10 किसानों को तसर पालन के लिए प्रशिक्षित किया, जिससे कई परिवारों की आय में सुधार हुआ। उनके योगदान के लिए उन्हें “सर्वश्रेष्ठ किसान” जैसे सम्मान भी मिले हैं।

श्री केवट कहते हैं,“तसर पालन ने मेरी जिंदगी बदल दी। आज मेरा परिवार सुरक्षित है और सबसे बड़ी खुशी यह है कि मैं दूसरों को भी आगे बढ़ने का रास्ता दिखा पा रहा हूँ।”