रायपुर 30 जनवरी 2026 / ETrendingIndia / इकोनॉमिक सर्वे में डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता
डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा अब राष्ट्रीय चिंता बन गया है। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में सरकार ने इस पर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार बच्चों और युवाओं में स्क्रीन पर बिताया समय तेजी से बढ़ा है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य पर इसका गहरा असर पड़ रहा है।
पढ़ाई, नींद और सामाजिक जीवन पर असर
सर्वे बताता है कि डिजिटल लत ध्यान और उत्पादकता को प्रभावित करती है। क्योंकि देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद पूरी नहीं होती, इसलिए थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। इसके अलावा सोशल मीडिया तुलना और साइबर बुलिंग भी तनाव बढ़ाती है। इस प्रकार डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य आपस में जुड़ते जा रहे हैं।
युवाओं में बढ़ रही चिंता और अवसाद
15 से 24 वर्ष के युवाओं में सोशल मीडिया की लत ज्यादा पाई गई है। इससे चिंता, अवसाद और आत्मविश्वास में कमी देखी जा रही है। जैसे लगातार स्क्रॉल करना और गेमिंग की आदतें व्यवहार में बदलाव ला रही हैं। परिणामस्वरूप नींद में कमी, सामाजिक दूरी और मानसिक थकान बढ़ रही है।
सरकार ने उठाए कई कदम
सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए कई पहल शुरू की हैं। जैसे CBSE की सुरक्षित इंटरनेट गाइडलाइन और शिक्षा मंत्रालय का ‘प्रज्ञता’ फ्रेमवर्क। इसके अलावा टेली-मानस हेल्पलाइन और NIMHANS की SHUT क्लिनिक भी सहायता दे रही हैं। अंततः डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए जागरूकता, सीमित स्क्रीन टाइम और संतुलित जीवनशैली जरूरी है।
