रायपुर, 30 जनवरी 2026/ ETrendingIndia / Medicinal plants have transformed the lives of PVTG women: Herbal products generate a turnover of ₹1.6 crore./ पीवीटीजी महिला हर्बल उत्पाद , छत्तीसगढ़ पीवीटीजी ( अत्यधिक पिछड़ी जनजातियाँ) महिलाएं जंगल से मिलने वाली वनौषधियों और हर्बल उत्पादों के उत्पादन, संग्रहण और विपणन के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत के गरियाबंद जिले में संचालित केशोडार वन-धन विकास केंद्र ने इन महिलाओं को पारंपरिक ज्ञान को आजीविका से जोड़ने का सशक्त माध्यम दिया है।
इस केंद्र से 8 स्वयं सहायता समूहों की 87 पीवीटीजी महिलाएं जुड़ी हुई हैं। महिलाएं जंगलों से सुरक्षित तरीके से औषधीय पौधों का संग्रहण करती हैं और फिर आधुनिक तकनीक की मदद से आयुर्वेदिक व हर्बल उत्पाद तैयार करती हैं। केंद्र में बनने वाले तेल, चूर्ण और औषधियों को आयुष विभाग से लाइसेंस प्राप्त है, जिससे इनके उत्पादों को बाजार में पहचान मिली है।
वन-धन विकास केंद्र की खासियत पारंपरिक तेल पाक पद्धति है, जिससे औषधियों के गुण सुरक्षित रहते हैं। राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के सहयोग से महिलाओं को प्रशिक्षण, मशीनें, पैकेजिंग और ब्रांडिंग की सुविधा मिली है। तैयार उत्पाद ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत संजीवनी स्टोर्स में बेचे जा रहे हैं।
जनवरी 2024 से मार्च 2025 के बीच केंद्र ने लगभग 1 करोड़ 60 लाख रुपये का कारोबार किया, जिससे महिलाओं को अच्छी आय और आर्थिक सुरक्षा मिली है। यह पहल जनजातीय महिलाओं को वनौषधियों के जरिए सशक्त बनाने का सफल मॉडल बनकर उभरी है।
